
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह विभागों के आवंटन पर कांग्रेस आलाकमान के फैसले को स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर उनसे गृह विभाग ले लिया जाता है तो वह पार्टी के एक साधारण कार्यकर्ता बने रहेंगे। खरगे की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मंत्रिपरिषद के गठन और विभागों के आवंटन को लेकर दिल्ली में कांग्रेस नेतृत्व के साथ गहन चर्चा के बाद बेंगलुरु लौटे हैं।
प्रियांक खरगे से जब विभागों के बंटवारे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मुझे गृह मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। अगर इसे वापस ले लिया जाता है तो मैं पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता बन जाऊंगा। उन्होंने विभागों के लिए मंत्रियों की व्यक्तिगत लॉबिंग की अटकलों को लेकर कहा कि विभागों का आवंटन न तो उनकी प्राथमिकता है और न ही यह उनके निर्णय का मामला है। उन्होंने कहा कि मेरी प्राथमिकता यह नहीं है कि मंत्रिपरिषद में कौन होगा या किसे हटाया जाएगा। यह मुख्यमंत्री की प्राथमिकता है। आलाकमान जो भी फैसला करेगा, हर कोई उसका पालन करेगा।
खरगे ने हालांकि यह स्वीकार किया कि पार्टी के लिए सभी दावेदारों को समायोजित करना एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी में योग्य लोगों की कोई कमी नहीं है। न तो नेतृत्व की कमी है और न ही क्षमता की, लेकिन जब 135 विधायक हों तो आप सभी को कैसे समायोजित करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन हर दावेदार को संतुष्ट करना संभव नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व की ओर से सभी को समायोजित करने का ईमानदार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सभी को खुश करना असंभव है।
खरगे ने प्रस्तावित सूची में बदलाव को सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि आलाकमान अंतिम क्षण में भी सूची में बदलाव कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी का विशेषाधिकार है। एक सूची तैयार की जा सकती है, आलाकमान के साथ चर्चा की जा सकती है और फिर से बदली जा सकती है। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है। उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि इस प्रक्रिया को लेकर सरकार के भीतर कोई संकट है और कहा कि अंतिम फैसला कांग्रेस नेतृत्व ही करेगा।
खरगे ने कहा कि अधिकारी आवासीय स्कूलों में दिए जाने वाले भोजन से जुड़ी घटनाओं की जांच कर रहे हैं। जिन मामलों में गड़बड़ी पाई गई है, वहां वार्डन के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि उपायुक्तों को औचक निरीक्षण करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि छात्रों को भोजन, पीने के पानी या अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े।