
बेंगलूरु। गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने फिर एक बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार कानूनी दायरे में रहते हुए संघ के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। संघ और उसके लगभग 100 साल के इतिहास का सरकार अध्ययन कर रही है और आगे की कार्रवाई उसी आधार पर तय किए जाएंगे। शनिवार को संवाददाताओं से बात करते हुए प्रियांक ने कहा कि वह संघ को कानूनी दायरे में लाने के लिए काम करेंगे।
जब उनसे पूछा कि संघ के पंजीकरण समेत विभिन्न मुद्दों पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लिखे उनके पत्र का कोई जवाब मिला है या नहीं, तो खरगे ने कहा कि उन्हें जवाब की उम्मीद ही नहीं थी। उन्होंने पहले भी कहा था कि जवाब नहीं आएगा। इस मामले से उचित तरीके से निपटेंगे। सरकार जो भी करेगी, वह कानूनी दायरे में रहकर करेगी। इस मुद्दे को उठाए करीब डेढ़ महीना हो गया है और आगे बढ़ने से पहले सरकार को संघ एवं उसके इतिहास का अध्ययन करने के लिए समय चाहिए। संघ के 100 साल के इतिहास का अध्ययन कर उसे समझना होगा। संघ खुद अपने इतिहास से अनजान है।
गृह मंत्री ने संघ प्रमुख मोहन भागवत पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हाल ही उन्होंने कुछ जेन-जी युवाओं से मुलाकात की। क्या यह उन युवाओं का समर्थन करने की कोशिश है, जिन्हें पहले पीटा गया था। क्या पहले उनकी पिटाई करना और फिर उनका समर्थन करना ही उनका तरीका है? उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि किसी को देशभक्त या देशद्रोही होने का प्रमाणपत्र देने का अधिकार संघ को किसने दिया। वे खुद पंजीकृत नहीं हैं और दूसरों को प्रमाणपत्र देते हैं। क्या वह तय कर सकते हैं कि कोई देशभक्त है या देशद्रोही? वे कौन होते हैं यह तय करने वाले? वे कौन होते हैं, इस तरह के प्रमाणपत्र बांटने वाले?
यह पूछे जाने पर कि उनके पत्र का जवाब नहीं मिलने पर सरकार क्या कार्रवाई करेगी, प्रियांक ने कहा कि सरकार अपनी योजना के मुताबिक आगे बढ़ेगी, लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया। इससे पहले प्रियांक ने संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, पंजीकरण, पदाधिकारियों, वित्तीय स्रोतों, खर्च, कराधान और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए प्राप्त अनुमतियों पर स्पष्टीकरण मांगा था। प्रियांक लगातार संघ की गतिविधियों और उसके पंजीकरण को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। डॉ भागवत ने इसे राजनीति प्रेरित करार देते हुए कहा था कि ऐसे निर्देशों का जवाब देने की जरूरत महसूस नहीं करते।