
बेंगलूरु. राज्य के पूर्व मंत्री एम पी रेणुकाचार्य रविवार को दक्षिण नाकोड़ा तीर्थ संकट मोचन पाŸव भैरव धाम अरसीकेरे पहुंचे और महा भैरवदेव के दर्शन किए। उन्होंने ट्रस्टी विजय कुमार सुराना से चर्चा में बताया कि तीर्थ धाम पर दर्शन करके उन्हें बड़ा सुकून महसूस हुआ। उन्होंने इसके आने वाले दिनंो में एक बड़ा स्वरूप लेकर राज्य के दार्शनिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की संभावना जताई।
ट्रस्ट की ओर से उनका शॉल, माला एवं स्मृति चिह्न से बहुमान किया गया। अरसीकेरे के अमरचंद चंडालिया, चंदनमल मेहता, मदनलाल मेहता, ललित मेहता, प्रवीण सोनीगरा, मांगीलाल मेहता, रमेश कटारीया, विनोद बलगट, चेतन मेहता, पारस सोनीगरा, तुमकुर, बेंगलूरु, कडुर से बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।
एक-दूसरे का सहयोग करें
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि हमने अपनी जिंदगी में बहुत कुछ किया है, लेकिन धन्यवाद देने में हमेशा कंजूस रहे हैं। जिसने हमारी जिंदगी में छोटा सा भी उपकार किया है उसको आज धन्यवाद देना है। उन्होंने कहा कि जो इंसान किसी को धन्यवाद देता है या आभार प्रकट करता है उस इंसान के जीवन में धैर्य बढ़ता है। सभी के सहयोग से हमारी जिदंगी चल रही है। हम अकेले कुछ भी नहीं कर सकते। एक झाड़ू का तिनका झाड़ू से अलग हो जाता है तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाता है। जब वह सब तिनको के साथ जुड़ा होता है तो घर की सफाई करता है। बिना सहयोग के इ
कर्म बंधन से ज्यादा महत्वपूर्ण अनुबंध
बेंगलूरु. जिनकुशल सूरी जैन आराधना भवन बसवनगुड़ी में साध्वी प्रियरंजनाश्री ने कहा कि अरिहंत परमात्मा ने अपने चार घाती कर्मों का नाश करके करुण भाव से भरकर प्राणी मात्र के कल्याण के लिए देशना दी। उन्होंने कहा कि ज्ञानी भगवंतों ने बताया कि कर्मों के बंधन से भी ज्यादा महत्व अनुबंध का है। पुण्य का अनुबंध तब होगा जब मन में मोक्ष पाने की तीव्र अभिलाषा होगी। परमात्मा की आज्ञा स्वीकार करने की भावना होनी चाहिए। प्राणी मात्र के लिए करुणा भाव आना चाहिए। तीव्र ज्ञान गर्भित वैराग्य मन में पैदा होना चाहिए।