उन्होंने कहा कि इन सब बातों का एक ही निष्कर्ष निकलता है कि आत्म कल्याण पुरुषार्थ करने से है।
बेंगलूरु. शांतिनगर जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में आचार्य महेंद्र सागर सूरी ने कहा कि जिन धर्म सिखाता है, आत्मा के अनुरागी बनो, स्वयं को काया और माया से दूर करो, राम-द्वेष को नाश करो, सच्चे देव-गुरु धर्म के उपासक बनो, चढ़ जाओ आत्मशुद्धि के मार्ग पर, करो तप से कर्मो की निर्जरा, क्रोधादि कषायों से बचो। उन्होंने कहा कि इन सब बातों का एक ही निष्कर्ष निकलता है कि आत्म कल्याण पुरुषार्थ करने से है।
जो ऐसा नहीं कर पाते उनके लिए जीवन केवल भटकाव है। यह भटकाव आत्मा की ओर निगाह करके धर्मोपासन करने से ही टाला जा सकता है। व्यक्ति अंग-प्रत्यंाग आदि की सर्वाधिक चिंता करता है जबकि ये पुदगल और नाशवान है। अपना वास्तविक उत्थान तो आत्मकल्याण में ही है। मन में सदैव करुणा जीवंत रहनी चाहिए। मनुष्य जीवन पाया है तो भव-भव के फेरे मिटाओ।
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सम्मेद शिखर की यात्रा करवाई
बेंगलूरु. पारस धाम के फाउण्डर मुकेश जैन ने पारस धाम के आसपास के गांव एवं बेंगलूरु के कुछ परिवारों के बच्चों को तथा उनके अभिभावकों को सम्मेद शिखर की यात्रा करवाई।