
हुबल्ली. जीत का ***** लगाने की जुगत में जुटे पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता जगदीश शेट्टर के लिए हुबल्ली-धारवाड़ मध्य क्षेत्र से इस बार का चुनावी खेल चुनौतीपूर्ण हो गया है। कांग्रेस प्रत्याशी पेशे से चिकित्सक डॉ. महेश नलवाड़ उन्हें 'हार की गोली' खिलाने की कोशिश में हैं। महेश न सिर्फ जगदीश के पारंपरिक लिंगायत मतों में सेंध लगाएंगे बल्कि जुड़वा शहरों के विकास में विफल रहने का ढिंढोरा पीटने में कसर नहीं छोडऩा चाहेंगे। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या के लोक कल्याणकारी कार्यक्रमों को मोहरा बनाकर लगातार पांच बार से विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता शेट्टर को मात देने की हर चाल चल रहे हैं।
लिंगायतों को धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा देने के सरकारी फैसले को भी महेश जोर-शोर से प्रचारित कर रहे हैं। वहीं, अपनी उम्मीदवारी की औपचारिक उद्घोषणा से बहुत पहले से ही जगदीश पत्नी शिल्पा शेट्टर के साथ घर-घर जन सम्पर्क शुरू कर चुके हैं। मुख्यमंत्री के रूप में २०१३ में शेट्टर ने १७,७५४ मतों से जीत हासिल की थी और बाद में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। अबकी बार उनके वफादार लोगों ने तक खिलाफत का रवैया अपना रखा है। सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों से क्षेत्र के विकास में शेट्टर के योगदान को लेकर सवाल किए जा रहे हैं।
पूर्व महापौर वीरण्णा सावडी का दावा है कहते हैं कि लिंगायत तथा अन्य समुदाय के मतदाता शेट्टर के कट्टर समर्थक हैं और वे इस बार भी उनका साथ नहीं छोड़ेंगे। साथ ही क्षेत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से जुड़े लोग भी बहुतायत में हैं, जो उनकी जीत के लिए कड़ी मेहतन कर रहे हैं।
शेट्टर की राह में नलवाड के साथ ही जनता दल (ध) के प्रत्याशी राजण्णा कोरवी भी दीवार बने हैं।
उनका कहना है कि बड़े पदों में रहने के बावजूद शेट्टर इस क्षेत्र को अच्छी सड़कें और पर्याप्त पेयजल मुहैया नहीं करवा सके हैं। बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) को लेकर होने वाली असुविधाएं भी शेट्टर के प्रतिकूल माहौल बना रही हैं। उधर, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रत्याशी पेशे से वैमानिकी अभियंता संतोष नरगुंड का हाइटेक चुनाव प्रचार भी शेट्टर के माथे की लकीरों की संख्या में बढ़ोतरी कर रहा है।खैर, तमाम कयासों और दावों के बीच जीत-हार की चाबी मतदाताओं के पास है, देखना होगा कि १५ मई को किसके भाग्य का ताला खुलता है।