केंद्र अनुमति दे तो राज्य सरकार उठाएगी हज यात्रा का खर्च
बेंगलूरु. अल्पसंख्यक कल्याण, हज एवं वक्फ मंत्री जमीर अहमद खान ने कहा कि केन्द्र सरकार ने अनुमति दी तो राज्य सरकार खुद हज पर यात्रियों को भेजनी की जिम्मेदारी लेने तैयार है। उन्होंने बुधवार को कर्नाटक हज भवन में हज जाने वाले यात्रियों को उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का निरीक्षण करने के बाद कहा कि हज पर जाने वाले यात्रियों को एयर इंडिया के जरिए आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ग्रीन श्रेणी के लिए 2.62 लाख रुपए और अजीजिया श्रेणी के लिए 2.30 लाख रुपए शुल्क संग्रहित किया जा रहा है। सउदी अरब के लिए टिकट की कीमत दस से बारह हजार रुपए है, जबकि यह विमानन कंपनी टिकट के नाम पर यात्रियों से 80 हजार रुपए संग्रहित कर रही है। इतनी बड़ाी रकम किस लिए संग्रहित की जा रही है, यह बात उनकी समझ से बाहर है। सउदी अरब सरकार रियायती दामों पर कई सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। मैंने जब इस मामले में पता लगाया तो जानकारी मिली कि हज यात्रा 1.30 लाख से 1.50 लाख रुपयों में पूरी की जा सकती है। इस तरह यात्रियों करीब एक लाख रुपए अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है।
धार्मिक यात्रा पर भी जीएसटी
दूसरी तरफ केन्द्र सरकार ने धार्मिक यात्रा के लिए भी हवाई जहाजों की टिकटों की कीमत पर भी जीएसटी लगाया है। जिससे यात्रियों का सफर खर्च अधिक हो गया है।
सब्सिडी न मिलने से नुकसान नहीं
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने इस साल से यात्रियों के लिए सब्सिडी बंद कर दी है। इससे यात्रियों को कोई नुकसान नहीं हो रहा है। पहले से ही सब्सिडी कट करने की मांग की जा रही थी। केन्द्र सरकार के पास सब्सिडी की राशि के तौर 1200 करोड़ रुपयों की बचत हुई है। यह राशि अल्पसंख्यकों की शिक्षा, ऋण जारी कर रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराने और अन्य कार्यक्रमों को जारी करना होगा। उन्होंने कहा कि कई निजी टूर एन्ड टै्रवेल्स के जरिए कुछ लोग यात्रियों से रुपए लेकर उन्हें धोखा दिया गया है।
इसलिए सभी टूर आपरेटर्स को लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य बनाया गया है। धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ शीघ्र आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। वे अगले साल सउदी अरब का दौरा कर यात्रियों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के सिलसिले में वहां की सरकार से चर्चा करेंगे।