
बेंगलूरु. डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमत के खिलाफ कांग्रेस और अन्य संगठनों की ओर से सोमवार को आहूत राष्ट्रव्यापी बंद के कारण राज्य में आम जनजीवन प्रभावित होने की संभावना है। गठबंधन सरकार में भागीदार जद-एस ने भी बंद को समर्थन देने की घोषणा की है। इसके अलावा वामदलों से जुड़े संगठन भी बंद के समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने भी शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान बंद के आह्वान के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उनकी पार्टी इसका समर्थन करेगी। कुमारस्वामी ने शुक्रवार को उडुपी दौरे के दौरान कहा था कि अगर केंद्र सरकार डीजल-पेट्रोल की कीमतें घटाने के लिए कदम नहीं उठाती है तो राज्य सरकार इसके बारे मेें विचार करेगी। कुमारस्वामी ने कहा कि महंगा तेल होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है लेकिन अगर केंद्र सरकार राहत देने के लिए तैयार नहीं होती है तो राज्य सरकार ऐसा करेगी। कुमारस्वामी ने संशोधित बजट में डीजल और पेट्रोल पर अतिरिक्त कर लगाया था और कांग्रेस के दबाव के बाद भी उसे वापस लेने से कई बार मना कर चुके हैं।
डीजल और पेट्रोल सस्ता नहीं करने के कारण केंद्र सरकार के खिलाफ बाइक रैली का नेतृत्व करने वाले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडूराव ने कहा कि मोदी सरकार ने ४ साल में डीजल-पेट्रोल करों में ११८ फीसदी की वृद्धि की है। डीजल पर ४२४ फीसदी कर है और इसे कम किया जाना चाहिए। महंगे तेल का प्रतिकूल असर देश की अर्थवस्था पर पड़ रहा है।
विभिन्न संगठनों की ओर से बंद को समर्थन मिलने के कारण सोमवार को बेंगलूरु सहित पूरे राज्य में सड़क परिवहन सेवा प्रभावित होने की संभावना है। सरकारी परिवहन निगमों कर्मचारी संगठनों ने भी बंद के समर्थन की घोषणा की है। हालांकि, इन निगमों के अधिकारियों का कहना है कि बसों के परिचालन के बारे में वे हालात को देखते हुए निर्णय लेंगे। बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम के अधिकारियों का कहना है वे आम दिनों की तरह सेवाओं का परिचालन करेंगे। निजी कैब सेवाओं पर भी बंद का असर पड़ेगा।