
मण्ड्या. सांस्कृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक खूबियों की नगरी श्रीरंगपट्टण राजनीतिक रूप से भी अनोखी परम्परा का गवाह रही है। श्रीरंगपट्टण विधानसभा क्षेत्र में 1952 से विधानसभा के 13 चुनावों में से 6 बार महिला प्रत्याशी निर्वाचित हुई हैं। यह संख्या प्रदेश के अन्य विधानसभा क्षेत्रों के लिहाज से सर्वाधिक है। मगर हैरत है कि इस चुनाव में यहां से एक भी महिला प्रत्याशी मैदान में नहीं है। यहां तक कि अखिल भारतीय महिला एम्पावरमेंट पार्टी तक ने कांग्रेस व भाजपा की तरह पुरुष प्रत्याशी उतारा है।
महिलाओं के लिए आरक्षण न होने के बावजूद इस क्षेत्र से तीन दशक से अधिक समय तक महिलाओं ने विधानसभा में प्रतिनिधित्व किया। 1986 के उप चुनाव के बाद से 27 साल महिला विधायक रहीं। यहां महिला मतदाता 1 लाख 5 हजार 133, जबकि पुरुष मतदाता 1 लाख 3 हजार 742 हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का इस संदर्भ में मानना है कि उम्मीदवार के लिए क्षेत्र का विकास महत्त्वपूर्ण होना चाहिए ना कि उसका महिला अथवा पुरष होना। उन्होंने यह भी कहा कि यहां से चुनी गईं तीन महिलाओं ने विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया।
स्थानीय लोगों का मानना है कि अधिकांश महिला जनप्रतिनिधियों ने अपने आपको स्थान विशेष तक समेटे रखा। इसके अलावा फंड की कमी के चलते विकास कार्य न होने से उनके खिलाफ महौल बना। राजनीतिक विश्लेषक व डी देवराज अर्स पिछड़ा वर्ग फोरम के अध्यक्ष एल संतोष ने कहा कि महिला जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल बिलकुल अलग रहा है। महिला राजनेता अपने बाद दूसरी, तीसरी पीढ़ी की महिलाओं को नेतृत्व सौंपने में असफल रहीं।
प्रमुख समस्याएं
बेशक कस्बे के दो किनारों से कावेरी नदी प्रवाहमान है, लेकिन कई क्षेत्रों में पेयजल का संकट है। विधानसभा क्षेत्र के गांवों में भी पानी की किल्लत बड़ा मुद्दा है। सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं की समयबद्ध उपलब्धता, बेहतर सड़कें और स्वास्थ्य सेवाएं भी लोगों की बड़ी जरूरतों में शामिल हैं। इसके अलावा तमाम विरासतों और प्राकृतिक स्थलों की मौजूदगी के बावजूद क्षेत्र में पर्यटन का विकास न हो पाना भी स्थानीय नेताओं की उदासीनता को बयां करते हैं।
अब नई पीढ़ी की बारी
कांग्रेस और जनता दल (ध) ने पूर्व महिला विधायकों के पुत्रों को टिकट दिया है। इससे स्पष्ट है कि महिला नेताओं ने अपने कुनबे को ही राजनीति में स्थापित करने के प्रयास किए हैं। कांग्रेस ने मौजूदा विधायक रमेश बाबू बंडी सिद्धेगौड़ा और जद (ध) ने रवीन्द्र श्रीकंठय्या को टिकट दिए हैं। रमेश बाबू तीन बार विधायक रहीं विजयलक्ष्मी बंडी सिद्धेगौड़ा और रवीन्द्र पार्वतम्मा श्रीकंठय्या के बेटे हैं।