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अशोक की राह में ‘अपने’ ही रोड़ा

पद्मनाभ नगर विधानसभा क्षेत्र का हाल
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बेंगलूरु. दक्षिण बेंगलूरु में स्थित पद्मनाभनगर विधानसभा क्षेत्र वोक्कालिगा राजनीति का गढ़ और भाजपा का अभेद्य किला रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का निवास स्थान होने के बावजूद यह विधानसभा क्षेत्र जनता दल (ध) के नियंत्रण में नहीं रहा और पिछले दो दशकों से भाजपा के पूर्व उपमुख्यमंत्री आर. अशोक अजेय हैं। वर्ष 1997 में पहली बार उत्तरहल्ली विधानसभा क्षेत्र से उपचुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे अशोक 1999 और फिर 2004 के चुनावों में भी यहां से विजयी रहे।

वर्ष 2008 में परिसीमन के बाद उत्तरहल्ली विधानसभा क्षेत्र से अलग पद्मनाभनगर का गठन हुआ तो जद (ध) और कांग्रेस ने अशोक की बादशाहत तोडऩे की पुरजोर कोशिश की। लेकिन, अभी तक नाकाम रहे हैं। 2008 और फिर 2013 में सत्ता विरोधी लहर के बावजूद अशोक की जीत का डंका बजा।हालांकि, हर बार की तरह आर. अशोक के जीत की सहज भविष्यवाणी करना आसान नहीं है। इस बार यहां अशोक को भाजपा से ही अलग होकर कांग्रेस में शामिल होने वाले एम. श्रीनिवास से चुनौती मिल रही है तो जद (ध)उम्मीदवार वी.के. गोपाल यहां जाना-पहचाना चेहरा हैं।

दरअसल, श्रीनिवास आखिरी समय में कांग्रेस में शामिल हुए और उन्हें टिकट देकर पार्टी ने अशोक के खिलाफ उतार दिया। इससे भाजपा के मतों में विभाजन की उम्मीद है। अशोक के लिए यह चुनौती इसलिए भी है क्योंकि श्रीनिवास ने ही अशोक को आगे बढ़ाया और अब उन्हीं से मुकाबला है। इसे गुरु और शिष्य के बीच चुनावी जंग के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि, अशोक के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों को लेकर लोग काफी हद तक संतुष्ट नजर आते हैं, लेकिन मतदाता दलगत और जातिगत आधार पर बंटे नजर आते हैं।

कई भाजपा कार्यकर्ता एम. श्रीनिवास के लिए भी काम कर रहे हैं जो अशोक के लिए चिंता का कारण है। अशोक ने भाजपा में वोक्कालिगा समुदाय के प्रभावशाली नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई है और क्षेत्र में लगभग 40 हजार वोक्कालिगा मतदाता हैं। लेकिन, जनता दल (ध) ने भी इस बार अशोक के खिलाफ कमर कसी है और वी.के गोपाल को उतारा है जो पिछले दो वर्षों से विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। कचरा निस्तारण बेंगलूरु शहर की आम समस्या है और पद्मनाभनगर इससे अछूता नहीं है। क्षेत्र में कुछ ऐसी जगह हैं जो एक तरह से कचरा डंपिंग यार्ड बन गए हैं। कुछ वार्ड जैसे गणेश मंदिर और करीसंद्रा में पार्किंग की समस्या है जो निवासियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है।

यहां फुटपाथ पर वाहनों की पार्किंग के कारण पैदल यात्रियों को तो परेशानी होती ही है वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। ये मुद्दे चुनाव में असर भी दिखा रहे हैं। रामचंद्रा कहते हैं कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ये समस्याएं जस की तस हैं। क्षेत्र में हरियाली तो है मगर तेज बारिश और हवाओं के कारण पुराने पेड़ों के उखडऩे की समस्या भी परेशानी का सबब बनती है। कई बार सफाईकर्मी सूखे पत्तों को इक_ा कर आग लगा देते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में धुआं फैल जाता है। इलियास नगर, बनशंकरी बस अड्डा के पीछे और कादिरेनहल्ली अंडरपास में कचरा जलाया जाता है। वहीं रिहायशी इलाकों में बढ़ती दुकानों की संख्या से भी निवासी असहज हैं।2013 में आर अशोक (भाजपा) ने कांग्रेस के चेतन गौड़ा को 20 हजार 123 मतों से पराजित किया। 2008 में आर अशोक ने जद (ध) के उम्मीदवार के. बाबू को 31 हजार 276 मतों से हराया।

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