Social Attendance at Cremation: श्मशान घाट पर ‘सामाजिक हाजिरी’। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह पता रहे कि मृतक को अंतिम विदाई देने कौन आया और कौन नहीं। नहीं आया तो क्यों ? सामाजिक एकता के लिए दुख के क्षण में शामिल होना जरूरी है। ताकि समाज में अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा जैसा कोई भी भेदभाव नहीं रहे। यह सिंधी समाज, बांसवाड़ा की अनूठी पहल है।
Social Attendance at Cremation: श्मशान घाट पर ‘सामाजिक हाजिरी’। ऐसा इसलिए, क्योंकि यह पता रहे कि मृतक को अंतिम विदाई देने कौन आया और कौन नहीं। नहीं आया तो क्यों ? सामाजिक एकता के लिए दुख के क्षण में शामिल होना जरूरी है। ताकि समाज में अमीर-गरीब, बड़ा-छोटा जैसा कोई भी भेदभाव नहीं रहे।
यह सिंधी समाज, बांसवाड़ा की अनूठी पहल है। इसका निर्वहन विगत दस साल से अधिक समय से समाज स्तर पर किया जा रहा है। इसका लेखा-जोखा भी समाज के पास उपलब्ध है। इसे वक्त-बेवक्त सामाजिक विषयों पर पर आवश्यकतानुसार सभी के सामने रखा जा सकता है। हालांकि अब तक एक बार भी ऐसी नौबत नहीं आई। बांसवाड़ा में फिलहाल 230 सिंधी परिवार हैं, जिनका पूरा डेटा बैंक भी सामाजिक स्तर पर तैयार किया गया है।
सामाजिक परंपरा के तहत मृत्यु की सूचना पर समाज का एक व्यक्ति रजिस्टर लेकर श्मशान घाट पर पहुंचता है। यहां मृतक को अंतिम विदाई देने के लिए आए सभी व्यक्ति रजिस्टर में स्वयं हस्ताक्षर करते हैं और अपना मोबाइल नंबर भी अंकित करते हैं। इससे उनकी उपस्थिति सुनिश्चित होती है।
इस सामाजिक परंपरा के साथ ही सिंधी समाज मौके पर गोशाला के लिए दान राशि भी एकत्र करता है, जिसे साल में एक बार चेटीचंड के अवसर पर गोशाला में भेंट की जाती है। साथ ही श्री झूलेलाल सेवा समिति के माध्यम से समाज के गरीब तबके को आर्थिक मदद भी दी जा रही है। इसके लिए जन्मोत्सव, वैवाहिक वर्षगांठ पर सक्षम परिवार राशि भेंट करते हैं।
सिंधी समाज आपने सभी सदस्यों को एक साथ लेकर चलने का प्रयास करता है। श्मशान घाट पर ‘सामाजिक हाजिरी’ का उद्देश्य भी यही है कि समाज में अमीर-गरीब या ऊंच-नीच किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं रहे और दुख के समय में सभी शामिल हों। इसके अलावा भी समिति अन्य सेवा कार्य कर रही है।