Banswara Gram Panchayat : बांसवाड़ा में ग्राम पंचायतें इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार कर्मचारियों का करीब एक साल का मानदेय बकाया है। जानें क्या है वजह?
Banswara Gram Panchayat : बांसवाड़ा के सज्जनगढ़ में ग्राम पंचायतें इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रही हैं। राज्य वित्त आयोग (एसएफसी) की अनुदान राशि लंबे समय से जारी नहीं होने के कारण पंचायतों कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। हालत यह है कि पंचायतों के लिए नियमित प्रशासनिक और बुनियादी खर्च उठाना भी मुश्किल हो गया है। पंचायत प्रतिनिधियों के अनुसार कर्मचारियों का करीब एक साल का मानदेय बकाया है।
पूर्व में कराए गए निर्माण कार्यों का भुगतान नहीं होने से लाखों रुपए अटके पड़े हैं। सामग्री सप्लाई करने वाले व्यापारी लगातार पंचायत कार्यालय पहुंचकर जनप्रतिनिधियों और ग्राम विकास अधिकारियों पर भुगतान का दबाव बना रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार जनसंख्या के आधार पर प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष 15 से है, 20 लाख रुपए तक का अनुदान जारी करती लेकिन पिछले तीन वर्षों से अधिकांश पंचायतों को यह राशि नहीं मिली। इससे पंचायतों का वित्तीय ढांचा पूरी तरह चरमरा गया है।
उन्होंने बताया कि स्थिति सुधारने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री को कई बार ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक राशि जारी नहीं हुई।
वर्ष 2020-21 से पंचायतों की अनुदान राशि बकाया चल रही है। तीन वर्षों में मुश्किल से 5 से 6 लाख रुपए ही प्राप्त हुए हैं। ऐसे में पंचायत संचालन बेहद कठिन हो गया है। स्टेशनरी, बिजली बिल, कार्यालय संचालन और अन्य आवश्यक खर्चों के चलते पंचायतों पर लाखों रुपए का कर्ज हो चुका है।
पासिंग सुरावत, अध्यक्ष, सरपंच संघ
पंचायतों को अनुदान राशि जारी करने संबंधी पत्रावली विधि विभाग को भेज दी गई है। अनुमोदन मिलते ही पंचायतों के खातों में राशि जमा करा दी जाएगी। पंचायत प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि जल्द अनुदान जारी होने पर पंचायतों को आर्थिक राहत मिलेगी और रुके हुए विकास कार्य दोबारा गति पकड़ सकेंगे।
रामजीलाल मीणा, वरिष्ठ उपसचिव, पंचायती राज विभाग
गढ़ी. सरकारी स्कूलों में आइटी, हेल्थ, कृषि, इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर, ऑटोमोटिव, बैंकिंग फाइनेंस, रिटेल और सिक्योरिटी जैसे व्यावसायिक विषय पढ़ाने वाले शिक्षक पिछले करीब 13 महीनों से वेतन नहीं मिलने से आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। विद्यार्थियों को रोजगार के लिए तैयार करने वाले इन शिक्षकों के सामने अब परिवार चलाने तक की समस्या खड़ी हो गई है। प्रदेशभर के करीब 4019 सरकारी विद्यालयों में 5 हजार से अधिक व्यावसायिक शिक्षक प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से सेवाएं दे रहे हैं।
बांसवाड़ा जिले में भी करीब 200 शिक्षक विभिन्न एजेंसियों के जरिए विद्यालयों में कार्यरत हैं। शिक्षकों का आरोप है कि कई प्लेसमेंट एजेंसियों की ओर से समय पर आवश्यक फाइलें शिक्षा विभाग को नहीं भेजी गईं, जिसके चलते भुगतान अटक गया। लंबे समय से वेतन नहीं मिलने से शिक्षकों में नाराजगी है। उन्होंने जल्द बकाया भुगतान जारी करने की मांग की है।