बांसवाड़ा

Banswara News : पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरी इस पार्टी के नतीजों पर रहेगी सबकी नजर, तय होगी भविष्य की राजनीति

भाजपा-कांग्रेस जैसे पुराने दलों के बीच भारतीय आदिवासी पार्टी (Bharatiya Adivasi Party) (बीएपी) का उभार और उसका जनाधार को रोकने में जुटि भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) का प्रदर्शन भी देखने के लिए लोगों में उत्सुकता है।

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Rajasthan Latest News : बांसवाड़ा. मोदी सरकार के तीसरी बार सत्ता में काबिज होने के दावों के बीच राजस्थान की चुनिंदा चर्चित लोकसभा सीटों में शुमार 'बांसवाड़ा' का नतीजा भविष्य की राजनीति की दशा-दिशा भी तय करने जा रहा है। मतदान हुए 35 दिन का लंबा इंतजार हो चुका है और अब सिर्फ 3 दिन बचे हैं नतीजों की तस्वीर साफ होने में। दक्षिण राजस्थान की यह हॉट सीट इसलिए भी चर्चा में है कि आदिवासी अंचल में नई तरह की राजनीतिक का उदय और करवट लेती पुरानी सियासत के बीच मतदाताओं के हाथों मथे गए उम्मीदवारों को भी राज्य में दूसरे सबसे ज्यादा मतदान का आंकड़ा माथापच्ची करने पर मजबूर कर गया था।

भाजपा-कांग्रेस जैसे पुराने दलों के बीच भारतीय आदिवासी पार्टी (Bharatiya Adivasi Party) (बीएपी) का उभार और उसका जनाधार को रोकने में जुटि भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) का प्रदर्शन भी देखने के लिए लोगों में उत्सुकता है। वर्ष 2018 के चुनाव में वजूद में आई बीटीपी वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में फिर पिछड़ती नजर आई। बीटीपी के 17 में से केवल 2 उम्मीदवार जीते थे। दोनों उम्मीदवार डूंगरपुर जिले से थे, जबकि आदिवासी बहुल बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिले से कोई नहीं जीता।

राजनीतिक जानकार इसकी खास वजह मानते हैं कि प्रचार के दौरान किया 73 प्रतिशत आरक्षण का वादा पूरा नहीं हो सका। संवैधानिक रूप से यह सभव भी नहीं है। बीटीपी से ही निकले नेताओं ने नई पार्टी बनी और बीएपी वजूद में आई। अधिवक्ता व स्थानीय राजनीतिक के जानकार अजीत सिंह चौहान कहते हैं कि संविधान 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण की अनुमति नहीं देता। राजनीतिक दल कुछ भी वादा कर सकते हैं। यही वादा कर बीएपी भी 2023 में चुनाव लड़ी और पार्टी का वोट शेयर 27.66 फीसदी से ज्यादा रहा। कांग्रेस के दिग्गज रहे महेन्द्रजीत सिंह गुट के पार्टी छोडऩे से कांग्रेस को धक्का लगा। कहा जाता है कि बीएपी को कांग्रेस का भी अंदरूनी समर्थन मिला।

RJ Lok Sabha Election 2024 : कांग्रेस-बीएपी के प्रदर्शन पर टिका भविष्य !
वागड़ अंचल में कांग्रेस की स्थिति कमजोर हुई है। सबसे पुरानी इस पार्टी की एक उमीद भारत आदिवासी पार्टी के भविष्य पर निर्भर करेगी। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने पत्रिका से बातचीत में इतना ही कहा- च्हमें सिर्फ उन्हें हराना था। कांग्रेस ही बीटीपी की तरह बीएपी को भी जनता से दूर ले जाएगी।

Lok Sabha Election 2024 :भाजपा : मालवीया पर खेला दांव
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राज्य में मिशन-25 के तहत बांसवाड़ा में कांग्रेस के पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीया (Mahendrajit Singh Malviya) को शामिल कर मैदान में उतारा। सर्वसमाज में मजबूत पकड़ के बूते चुनाव लड़े मालवीया की सीधी टक्कर बीएपी के राजकुमार रोत से मानी जा रही है। दक्षिण राजस्थान की राजनीति को समझने वाले मानते हैं कि भले कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा, मगर त्रिकोणीय टक्कर के बावजूद मुख्य मुकाबला रोत और मालवीया के बीच ही है। जीत-हार का अंतर भी बेहद कम रहने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

फैक्ट फाइल
26 अप्रेल को दूसरे चरण में हुआ था बांसवाड़ा सीट पर मतदान

72.77 फीसदी मतदान हुआ था यहां, राजस्थान में दूसरा सबसे ज्यादा

4 जून को दोपहर 12 बजे तक परिणाम आने की उम्मीद

5 सीटें बांसवाड़ा व 3 सीटें डूंगरपुर जिले की मिलकर बनी है लोकसभा सीट

5 साल : बीटीपी से बीएपी तक
2018 के चुनाव में समूचे वागड़ अंचल में बीटीपी का शोर मच गया था। विधानसभा चुनाव 2023 में इसी पार्टी के कुछ खास नेताओं ने नई भारत आदिवासी पार्टी बनाई। लोकसभा चुनाव में बीएपी ने दांव लगा दिया। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि बीएपी ने कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध मारी।

बीटीपी : दूसरे चुनाव में शून्य
आरक्षण के वादे पर पहला चुनाव जीती बीटीपी को पिछले विधानसभा चुनाव (Rajasthan Assembly Election 2023) में तगड़ा झटका लगा। दो सीटों से पार्टी शून्य पर आ गई। 2018 में सागवाड़ा से रामप्रसाद और चौरासी से राजकुमार रोत जीते थे। नई बीएपी (BAP) के गठन के बाद 2023 में राजकुमार रोत ने चौरासी से न केवल अपनी सीट बरकरार, बल्कि आसपुर व धरियावद के अलावा मध्यप्रदेश की सैलाना भी कब्जा ली।

Updated on:
01 Jun 2024 04:35 pm
Published on:
01 Jun 2024 03:46 pm
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