
Banswara school van accident: बांसवाड़ा। दाहोद मार्ग पर हुए दर्दनाक स्कूल वैन हादसे में जान गंवाने वाले 16 वर्षीय हयान वसानिया, पुत्र डॉ. राजेश वसानिया का कागदी मोक्षधाम में गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। हादसे के बाद पूरे शहर में शोक की लहर है।
परिजन जिम्मी सराफ ने बताया कि हयान का बड़ा भाई कलश वसानिया वियतनाम से गुरुवार को बांसवाड़ा पहुंचा। भाई के घर पहुंचते ही परिजनों का दर्द एक बार फिर छलक पड़ा और घर का माहौल बेहद भावुक हो गया।
इसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें हयान की माता निक्की वसानिया भी बेटे की अंतिम विदाई तक साथ चलीं। कागदी मोक्षधाम में विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान नेमा समाज सहित सर्व समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभी ने नम आंखों से हयान को अंतिम विदाई दी। उसकी याद में परिजन बार-बार फफक रहे थे।
उधर, बालवाहिनी संचालन के लिए चालकों के पास कम से कम 5 वर्ष का अनुभव और ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य होगा। बाल वाहिनियों में क्षमता से अधिक विद्यार्थी नहीं बैठा सकेंगे। बाल वाहिनियों की नियमित चैकिंग की जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई होगी। बिना फिटनेस की गाडि़यों को शुक्रवार से जब्त किया जाएगा। पुलिस लाइन में गुरुवार को हुई बैठक में विद्यार्थियों की सुरक्षा पर गहन चर्चा के बाद ये निर्णय लिए गए। स्कूल प्रतिनिधियों एवं बाल वाहिनी संचालकों के साथ पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे।
-स्कूली बस-ऑटो-कैब के पीछे अब ऑन स्कूल ड्यूटी लिखना होगा। उस पर विद्यालय का नाम और फोन नंबर भी अंकित रहेगा, ताकि आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।
-वाहन में चालक का नाम, पता, लाइसेंस नंबर, वाहन स्वामी का मोबाइल नंबर, चाइल्ड हेल्पलाइन और यातायात हेल्पलाइन स्पष्ट रूप से अंकित हो।
-चालक के पास कम से कम 5 वर्ष का अनुभव और वैध ड्राइविंग लाइसेंस हो।
-सभी वाहनों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र, पानी की बोतल रखने की व्यवस्था और बैग रैक अनिवार्य।
-सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार निर्धारित क्षमता से डेढ़ गुना से अधिक विद्यार्थियों को बैठाना प्रतिबंधित।
-दो वर्ष में कम से कम एक बार सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण और मेडिकल चेकअप (नेत्र व स्वास्थ्य जांच) अनिवार्य।
-चालक और परिचालक को निर्धारित वर्दी पहनना अनिवार्य
-वाहनों में स्पीड गवर्नर, जीपीएस, डोर लॉक और लोहे की जाली जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं अनिवार्य रूप से लगवाई जाए। नियम तोड़ने वाले चालकों को तुरंत हटाया जाए।
-शैक्षणिक संस्थान प्रमुख सड़क सुरक्षा क्लब्स के माध्यम से बाल वाहिनी योजना सख्ती से लागू कराएं। इस क्लब में एक वरिष्ठ अध्यापक अथवा व्याख्याता स्तर का यातायात संयोजक नियुक्त किया जाए।
-सभी शैक्षणिक संस्थान एक ट्रेफिक प्लान तैयार कर बाल वाहिनी के प्रत्येक वाहनों में छात्राओं को सुरक्षित चढ़ने-उतरने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
-बसों का रंग सुनहरा पीला और चालक को एक परिचय-पत्र दिया जाए।
-चालक के पास वाली सीट पर 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नहीं बैठाया जाए।