
बांसवाड़ा। गांवों की सरकार बनाने के लिए चल रहे पंचायती राज चुनाव का तीसरा चरण सरपंच, उपसरपंच एवं वार्ड पंचों के चुनाव परिणाम के साथ ही खत्म हुआ। देर रात्रि गहमागहमी भरे माहौल में सरपंचों के लिए हुए मतदान के बाद मतदान टोलियों ने मत पर्चियों की गणना की। एक के बाद एक नतीजे आने के साथ ही पंचायत मुख्यालय पर नारेबाजी के दौर चले। शुक्रवार सुबह उपसरपंच के निर्वाचन प्रक्रिया हुई। इसमें कई ग्राम पंचायतों में निर्विरोध उपसरपंचों का निर्वाचन हुआ। पंचायत राज चुनाव के परिणामों में कई ऐसे परिणाम सामने आए, जिनकी राजनीतिक हलकों में चर्चा हो रही है।
आनंदपुरी पंचायत समिति क्षेत्र में पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया के करीबी माने जाने वाले नेताओं के परिवारों को इस बार ग्रामीणों के चुनावी फैसले का सामना करना पड़ा। इनमें छाजा और टामटिया ग्राम पंचायत के परिणाम विशेष रूप से चर्चा में है। छाजा ग्राम पंचायत में पिछले करीब 30 वर्षों से हरिशंकर देवतरा के परिवार का राजनीतिक प्रभाव बना हुआ था। आनंदपुरी प्रधान हरिशंकर देवतरा को पूर्व कैबिनेट मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया का करीबी माना जाता है। इस बार चुनाव में ग्रामीणों की नाराजगी के बीच उनके परिवार की गीता देवी को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में तुलसी देवी ने 1097 मत प्राप्त कर जीत दर्ज की, जबकि गीता देवी को 567 मत मिले। इस तरह तुलसी देवी ने 530 मतों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। लगातार तीन बार गीता देवी के सरपंच रहने के बाद इस बार मतदाताओं ने बदलाव का फैसला सुनाया।
इसी प्रकार टामटिया ग्राम पंचायत में भी पिछले करीब 25 वर्षों से हकरिया कलासुआ के परिवार का प्रभाव माना जाता रहा है। हकरिया कलासुआ भी महेंद्रजीत सिंह मालवीया के करीबी माने जाते हैं। इस बार चुनाव में उनके परिवार को भी हार का सामना करना पड़ा। हालांकि यहां जीत-हार का अंतर ज्यादा नहीं रहा।
आनंदपुरी पंचायत समिति क्षेत्र की आबला पंचायत में सरपंच के चुनाव में खड़ी हुई देवकन्या को 356 मत तथा उनके निकटस्थ संतु को 354 मत मिले। महज 2 वोट से देवकन्या विजयी हुई। इसी तरह पूजा खुलड़ी पंचायत में कमतुदेवी महज 5 वोट से चुनाव जीती। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी गंगा को 170 मत मिले हैं। टेमरन पंचायत में दिनेश पारगी 3 वोटों से सरपंच का चुनाव जीते। उन्हें 533 मत मिले। जबकि, प्रतिद्वंदी असीताकुमारी को 530 मत मिले। पाटनधारा में गोतमलाल पारगी को 422 एवं मोहनलाल को 418 मत मिले। महज 8 वोट से गोतमलाल विजयी हुए।