
बांसवाड़ा. जिले की सरेड़ी बड़ी ग्राम पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही गांवों की चौपालों पर पुराने चुनावी किस्सों की चर्चा भी शुरू हो गई है। बांसवाड़ा जिले के सरेड़ी बड़ी में भी ऐसे कई जनप्रतिनिधि रहे, जिन्होंने अपने काम और राजनीतिक पहचान से अलग मुकाम हासिल किया। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ध्रुव शंकर पाठक का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने वागड़ की राजनीति में अपनी पहचान बनाने के साथ जयपुर और दिल्ली तक पहुंच बनाई थी।
ध्रुव शंकर पाठक का जीवन राजनीति में आने से पहले मुंबई से जुड़ा हुआ था। वे वहां प्लास्टिक के खिलौने बनाने की फैक्ट्री चलाते थे। उस दौर में मुंबई और गांव के बीच आना-जाना भी आसान नहीं था, लेकिन पाठक अपनी बुलेट मोटरसाइकिल से सफर किया करते थे। वर्ष 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय वे वापस अपने गांव सरेड़ी बड़ी लौट आए। गांव आने के बाद वे यहीं के होकर रह गए और स्थानीय राजनीति में सक्रिय हो गए।
गांव लौटने के बाद ध्रुव शंकर पाठक ने प्रभाशंकर पंड्या के साथ मिलकर अपना राजनीतिक सफर शुरू किया। वे शुरुआत में ही निर्विरोध सरपंच चुने गए। इसके बाद वर्ष 1977 तक करीब 12 वर्षों तक सरपंच के रूप में अपनी भूमिका निभाई। लगातार निर्विरोध चुना जाना उस समय गांव में उनकी स्वीकार्यता और राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है।
राजनीति के साथ-साथ पाठक भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) में विकास अधिकारी के रूप में भी कार्यरत रहे। सरपंच रहते हुए उनके तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया और पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी से करीबी संबंध रहे। इन्हीं संपर्कों के जरिए उन्होंने गांव के विकास से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
ध्रुव शंकर पाठक के कार्यकाल में सरेड़ी बड़ी को बांसवाड़ा-डूंगरपुर मार्ग से जोड़ने के लिए चाप नदी पर पुल निर्माण की स्वीकृति दिलाने और उसके निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुल बनने से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर करने में मदद मिली।
पुल के उद्घाटन कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया भी पहुंचे थे। इस दौरान ध्रुव शंकर पाठक ने सरपंच के रूप में अंग्रेजी में भाषण दिया। उनका भाषण सुनकर वहां मौजूद लोग, मुख्यमंत्री और अन्य प्रमुख नेता भी हैरान रह गए थे। उस दौर में गांव के सरपंच का अंग्रेजी में भाषण देना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया था।
ध्रुव शंकर पाठक की राजनीतिक यात्रा आज भी सरेड़ी बड़ी के पुराने चुनावी किस्सों में याद की जाती है। मुंबई से गांव लौटकर स्थानीय राजनीति में सक्रिय होना, लंबे समय तक निर्विरोध सरपंच रहना और विकास कार्यों के लिए अपनी पहचान बनाना उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख पड़ाव रहे।