Promotion Of Senior Teachers: शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया से पहले शिक्षकों से अचानक 11 साल की एपीआर तीन दिन में मांगे जाने से असमंजस की स्थिति बन गई है।
बांसवाड़ा। शिक्षा विभाग के कार्य रामभरोसे नजर आ रहे हैं। ताजा मामला वरिष्ठ अध्यापकों की पदोन्नति से जुड़ा है। हर वर्ष शिक्षकों की ओर से ब्लॉक कार्यालयों में एपीआर (वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन) जमा करवाए जाने के बावजूद अब विभागीय पदोन्नति के ऐन वक्त पहले शिक्षा विभाग शिक्षकों से तीन दिन में एक साथ 11 साल की एपीआर मांग रहा है। बोर्ड परीक्षा करवा रहे शिक्षक असमंजस में हैं कि अब एक साथ 11 साल की एपीआर रिपोर्ट के लिए जादुई छड़ी घुमाएं या केवल औपचारिकता निभाएं।
शिक्षा विभाग के उदयपुर संभाग के सेकंड ग्रेड शिक्षकों की व्याख्याता पद पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की तैयारी चल रही है। इस बीच उदयपुर निदेशालय कार्यालय से संभाग अंतर्गत बांसवाड़ा, डूंगरपुर, उदयपुर, सलूम्बर, प्रतापगढ़, राजसमंद और चितौड़गढ़ जिले के करीब साढ़े चार हजार शिक्षकों से एपीआर मांगी जा रही है।
शिक्षकों का कहना है कि वे हर साल एक जुलाई से 30 जून के मध्य की एपीआर सीबीईईओ कार्यालय में जमा करवाते हैं। वहीं सीबीईईओ कार्यालय भी डीईओ और डीईओ से सीडीईओ कार्यालय को एपीआर की फाइल भेजता है। पूर्व में भी डीपीसी की तैयारियों के दौरान उन्होंने दो बार एपीआर भरकर दी है, लेकिन विभाग तीसरी बार एपीआर मांग रहा है।
एपीआर में शिक्षक के पूरे वर्ष के कार्य का आकलन होता है। इसमें परीक्षा परिणाम, प्रशिक्षण और अन्य कार्यों का ब्यौरा शामिल होता है। इसे संस्थाप्रधान प्रमाणित करते हैं। प्रावधानों के अनुसार किसी भी शिक्षक की पदोन्नति बिना एपीआर के नहीं हो सकती। पर एक साथ 11 वर्ष की एपीआर मांगे जाने पर शिक्षक और विभाग दोनों ही औपचारिकता निभाने में जुट गए हैं।
शिक्षा विभाग ने 2020-21 से एपीआर की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। फिलहाल हो रही वरिष्ठ अध्यापकों की डीपीसी वर्ष 2014-15 से 2024-25 तक की अवधि के लिए हो रही है। ऐसे में 11 वर्षों की एपीआर मांगी जा रही है। हालांकि कई शिक्षकों की एपीआर ऑनलाइन अपडेट नहीं है। ऐसे में उन्हें पूरे 11 साल की रिपोर्ट उपलब्ध करानी पड़ रही है।
शिक्षकों की एपीआर महत्वपूर्ण दस्तावेज होती हैं, लेकिन डीईओ, सीडीईओ और निदेशालय कार्यालयों में अधिकांशत ये फाइलें लाल बस्तों में रख दी जाती हैं। कार्यालयों के कार्मिकों का मानना है कि डीपीसी पांच से दस साल में होती है और उसी समय इन फाइलों की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में ये फाइलें लंबे समय तक पड़ी रहती हैं।
डीपीसी प्रक्रिया के लिए एपीआर का पूर्व में दो बार संकलन कराया जा चुका है। इसके बावजूद तीसरी बार एपीआर मांगा जाना उचित नहीं है। विभाग को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि पहले संकलित की गई एपीआर का क्या हुआ। यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो उसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
हमारी ओर से जितनी भी एपीआर आती है, उनकी फाइल बनाकर निदेशालय कार्यालय भेज दी जाती है। बांसवाड़ा जिले से पहले 1256 शिक्षकों की एपीआर मांगी गई थी, लेकिन अब संशोधित सूची जारी की गई है। इसमें करीब 60 फीसदी शिक्षकों की एपीआर उपलब्ध हो चुकी है।