RBSE 10th Result : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के 10वीं के परीक्षा परिणाम मंगलवार दोपहर 1 बजे घोषित होंगे। आप सिर्फ एक क्लिक पर घर बैठे परिणाम जान लेंगे। कभी घंटों अखबार का परीक्षार्थी इंतजार करते थे। कई बुजुर्गों के पास आज भी है दसवीं बोर्ड के रोल नंबर के अखबार संरक्षित हैं।
RBSE 10th Result : राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर के 10वीं के परीक्षा परिणाम मंगलवार दोपहर एक बजे घोषित होंगे। इसके साथ ही लाखों विद्यार्थियों का इंतजार भी खत्म होगा और विद्यार्थी अपने घर में ही बैठे-बैठे मोबाइल एवं लेपटॉप आदि से मिनटों में परिणाम जान सकेंगे। हालांकि, आज की पीढ़ी को यह थोड़ा आश्चर्य लगे पर, करीब तीन दशक पूर्व तक हालत ऐसे नहीं थे। बोर्ड के परीक्षा परिणाम देखने के लिए विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों को घंटों इंतजार तो कई बार अगले दिन सुबह आने वाले अखबार का इंतजार करना पड़ता था। दसवीं बोर्ड के घोषित हो रहे परीक्षा परिणाम को लेकर यादों की गठरी में कुछ यादें करते हैं ताजा…
दसवीं के नतीजों की घोषणा होने के साथ ही लोगों की मजमा बस स्टैंड पर जुट जाता था और जयपुर-अजमेर से अखबार लेकर आने वाली गाड़ी का इंतजार होता था। इन गाड़ियों के आते ही लोगों की भीड़ जयपुर से रिजल्ट वाले अखबार का लेने और उनमें रोल नंबर देखने के लिए जुट जाते थे। यहां अखबार में रोल नंबर देखने वाले भी कुछ दक्ष लोग मिनटों में रोल नंबर देखकर बताया करते थे। भीड़ में खड़े विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों के चेहरे पर तनाव और उम्मीद साफ झलकती थी।
अब परीक्षा परिणाम कुछ सालों से 90 फीसदी से भी अधिक रह रहा है। वहीं, अधिकांश विद्यालयों का परिणाम शत-प्रतिशत रहता है। ऐसे में विद्यार्थी परिणाम को लेकर आश्वस्त रहते हैं। पर, चार से पांच दशक पूर्व बोर्ड के नजीते 28 से 40 फीसदी में ही सिमट जाते हैं। ऐसे में कहा जाता था कि बोर्ड में आधे बच्चों के डिब्बे गोल हो जाते हैं।
वर्ष 1995 के पूर्व तक दसवीं बोर्ड में नौंवी एवं 10वीं दोनों का पाठ्यक्रम आता था। ऐसे में विद्यार्थियों को एक ही साल में दो-दो साल की पढ़ाई पढऩे के साथ ही उसकी परीक्षा देनी होती थी। लेकिन, वर्ष 1996 से 10वीं की परीक्षा में 10वीं का ही पाठ्यक्रम आने लगा।
वर्ष 1995 तक दसवीं कक्षा में छहमाही परीक्षा औपचारिक थी। उसके अंक वार्षिक परीक्षा में जुड़ते नहीं थे। पर, 1996 से दसवीं बोर्ड की परीक्षा में अर्द्धवार्षिक परीक्षा के 10 फीसदी अंक जोड़े जाने लगे और बाद के वर्षों में यह 20 तक बढ़ गए। ऐसे में अब सत्रांक अंकों को जैकपॉट लगा रहे हैं।
तीन से चार दशक पूर्व स्कूली शिक्षा में सबसे अहम पड़ाव दसवीं बोर्ड ही आंका जाता था। दसवीं बोर्ड पास होना अपने आप में एक पहाड़ या स्टेट्स सिंबल माना जाता था। दसवीं बोर्ड पास होने के साथ ही विद्यार्थी का भविष्य तय होता था कि वह आगे पढ़ेगा या नहीं। परीक्षा साथ ही पूरा गांव और शहर रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार करता था।
177 बोर्ड परीक्षा बनाए थे बांसवाड़ा में बोर्ड के।
29,855 परीक्षार्थी हैं 10वीं-प्रवेशिका के।
23,783 परीक्षार्थी हैं 12वीं एवं वरिष्ठ उपाध्याय के।
10,68,078 परीक्षार्थी है दसवीं बोर्ड में पूरे प्रदेश में।