पेपरलैस मॉड्यूल लागू होने के बाद से वंचित ग्रामदानी अध्यक्षों को फिर से मिलेंगे नामातंरण के अधिकार, जानिए पूरी खबर।
बांसवाड़ा। राज्य सरकार ने बजट में ग्रामदानी किसानों को खातेदारी अधिकार की सौगात दी है। अब सरकार ने अधिनियम में संशोधन कर खातेदारी अधिकार देने का निर्णय लिया है। इससे ग्रामदानी गांवों के किसान बैंक लोन ले सकेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे। यह संशोधन पूरे जनजाति क्षेत्र पर लागू होगा। खासकर बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिले के किसानों को इसका बड़ा लाभ मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि पहले ऑनलाइन भू-नामांतरण सिस्टम लागू होने के बाद भी ग्रामदानी अध्यक्षों को एसएसओ आईडी और पासवर्ड जारी नहीं होने से किसान पीएम किसान सम्मान निधि, केसीसी लोन, आदान-अनुदान और आपदा सहायता जैसी योजनाओं से वंचित रहना पड़ता था।
जबकि पूर्व में ग्रामदानी एक्ट-1971 के अनुसार नामांतरण खोलने का अधिकार ग्रामसभा के प्रस्ताव के बाद ग्रामदानी अध्यक्षों को ही दिया गया था। लेकिन दिसंबर 2023 से पेपरलैस मॉड्यूल लागू होने के बाद सरपंचों को अधिकार तो मिले, लेकिन ग्रामदानी अध्यक्षों को नजरअंदाज कर दिया गया। इससे किसानों को नामांतरण कराने के लिए तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।
राजस्थान पत्रिका ने हजारों किसानों के खातेदारी अधिकार से वंचित होने का मामला उठाया था और इसे लेकर खबर भी प्रकाशित की थी। अब बुधवार को जारी बजट में प्रदेश सरकार सरकार ने यह कदम उठाया है। घोषणा से ग्रामदानी अधिनियम से शासित गांवों के हजारों किसानों को खातेदारी अधिकार का लाभ मिलेगा और वे अब योजनाओं से वंचित नहीं रहेंगे।