Mid-Day Meal : राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मिड-डे-मील के बर्तन-भांडे बदले जाएंगे। बजट आवंटित करने के लिए जिलों के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
Mid-Day Meal : घाटोल ब्लॉक सहित बांसवाड़ा जिले के सवा पांच सौ से ज्यादा सरकारी स्कूलों में मिड डे मील बनाने में इस्तेमाल लिए जा रहे पुराने चूल्हे-बर्तन अब बदले जाएंगे। हालांकि पीएम पोषण योजना के तहत इसके लिए प्रदेश के हजारों स्कूलों की सूची बना ली गई है, लेकिन बजट आवंटित करने के लिए जिलों के अधिकारियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इसमें रिप्लेसमेंट के लिए नामांकन को आधार बनाकर स्कूलों को पैसा देने की शिक्षा मंत्रालय की गाइडलाइन से भेदभाव के आरोप उठे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार मिड-डे-मील कार्यक्रम आयुक्तालय की ओर से इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (प्रारंभिक) को आदेश जारी कर स्थानीय अधिकारियों से सूचनाएं संकलित की जा रही हैं। जारी आदेश में राज्य सरकार ने प्रदेश के 53 हजार 738 विद्यालयों और मदरसों में पांच साल या इससे ज्यादा पुराने किचन उपकरणों चूल्हे, बर्तन, कंटेनर आदि बदलने की कवायद होगी।
योजना में 10 हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक राशि स्कूलों को नामांकन के आधार पर दे होगी। इसमें 50 विद्यार्थियों तक प्रति स्कूल 10 हजार, उससे ज्यादा 150 विद्यार्थियों तक प्रति स्कूल 15 हजार, 151 से 250 विद्यार्थियों तक 20 हजार रुपए प्रति स्कूल तथा 251 या उससे अधिक विद्यार्थी वाले प्रति स्कूल को 25 हजार रुपए मिलेंगे।
स्वीकृत राशि से स्कूल अपनी वास्तविक आवश्यकता अनुसार तीन मदों में जैसे कुकिंग डिवाइस में खाना पकाने के उपकरण जैसे- स्टोव, गैस चूल्हा आदि, कंटेनर यानी अनाज और अन्य खाद्य सामग्री सुरक्षित रखने के लिए डिब्बे-टंकियां या खाना पकाने और परोसने के लिए बर्तन जैसे थाली, कटोरी, भगोने खरीदे जा सकेंगे।
शिक्षक संघ सियाराम के जिलाध्यक्ष नवीनकुमार जोशी, मंत्री महिपाल भूता और श्रीपाल जैन ने बताया कि आयुक्तालय की चयन सूची में कई पंचायतों से आधी शालाओं को शामिल किया गया है। अन्य स्कूलों से यह भेदभाव न्यायोचित नहीं है। इसलिए शिक्षक विरोध कर रहे हैं।
वर्षों बाद मिड डे मील के बर्तन-भांडों की सुध ली, यह कदम स्वागतयोग्य है, लेकिन सभी स्कूलों खासकर जनजाति क्षेत्र के अभावग्रस्त हालात पर समान बजट आवंटन होना चाहिए। साथ ही स्कूलों की भोजन शालाओं के मरम्मत, नवनिर्माण करवाने पर भी ध्यान देना जरूरी है।
नानूराम डामोर, प्रदेश मंत्री, शिक्षक संघ सियाराम