Rajasthan : लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में गृह मंत्रालय की ओर से एनएचआरसी के हवाले से पेश रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ। पुलिस हिरासत में कैदियों-बंदियों की मौतों के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर आ खड़ा हुआ है। पहले का नाम आपको चौंकाएगा नहीं।
Rajasthan : पुलिस हिरासत में कैदियों-बंदियों की मौतों के मामले में राजस्थान अब देश में दूसरे स्थान पर आ खड़ा हुआ है। राज्य के पुलिस कारागारों में पिछले साल मौतों का आंकड़ा 9 था, जो मौजूदा वर्ष में 50 फीसदी बढक़र 18 पर पहुंच गया। आंकड़े पुलिस पर गम्भीर सवाल खड़े करते हैं। हालांकि मौतों की कई वजहें हो सकती हैं।
लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में गृह मंत्रालय की ओर से एनएचआरसी (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) के हवाले से पेश रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि वित्तीय वर्ष 25-26 में 15 मार्च तक पूरे देश में पुलिस हिरासत में 170 कैदियों की मौतें हुईं। पहले स्थान पर बिहार में 19, दूसरे पर राजस्थान 18 एवं तीसरे स्थान पर उत्तरप्रदेश में 15 कैदियों की मौत पुलिस हिरासत में हुई। राजस्थान में हुई मौतों में वे भी शामिल हैं, जो विचाराधीन थे या पुलिस जांच चल रही थी।
गौरतलब है कि पिछले साल 26 सितम्बर को डूंगरपुर के दोवड़ा थाना क्षेत्र करालिया निवासी दिलीप अहारी को चोरी के आरोप व शक में हिरासत में लेने के बाद उसकी मौत का मामला भी गरमाया था। लोगों के आक्रोश व कलक्ट्रेट के घेराव के बाद थानेदार सहित पांच पुलिसकर्मियों का निलम्बन हुआ। परिजनों को 27.50 लाख रुपए का मुआवजा भी देना पड़ा।
वर्ष - देश में राजस्थान में
2021-22 176 13
2022-23 163 04
2023-24 157 07
2024-25 140 09
2025-26 170 18
विचाराधीन-दोषी कैदी
पुरुष 16799 5291
महिला 464 126
अन्य 0 01
योग - 17263 5420
पुलिस एवं लोक व्यवस्था राज्य के अधीन है, फिर भी मानवाधिकार की सुरक्षा के लिए एनएचआरसी कैदी की मृत्यु होने पर चाहे प्राकृतिक हो या अन्य कोई कारण, 24 घंटों में रिपोर्ट लेता है।
आयोग पोस्टमार्टम की वीडियो रिकॉर्डिंग करा कर जांच कमेटी गठित करता है। मृत्यु का कारण इरादे या यातना से होना पाए जाने पर संबंधित लोक सेवक के विरुद्ध केंद्र या राज्य के अधिकारियों को अभियोजन कार्रवाई के लिए सिफारिश करता है।
मेरे प्रश्न पर एनएचआरसी की रिपोर्ट में सामने आया राजस्थान में कैदियों की मृत्यु का आंकड़ा चौंकाने वाला है। पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े का दोगुना है, यह चिंतनीय है। इसके लिए कड़ी निगरानी एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जानी जरूरी है।
राजकुमार रोत, सांसद, बांसवाड़ा-डूंगरपुर