बांसवाड़ा

राजस्थान के इस अस्पताल का हैरतअंगेज कांड, गर्भ में मरे हुए बच्चे को निकालने के भी ले लिए 2,000 रुपए

Rajasthan News : राजस्थान के इस अस्पताल का अमानवीय चेहरा। बांसवाड़ा में महात्मा गांधी राजकीय जिला अस्पताल में गर्भवती आदिवासी महिला के पेट में बच्चा मृत था, जिसकी डिलीवरी कराने के नाम पर दो हजार रुपए लेने से कार्मिक नहीं चूके।
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Rajasthan this Hospital Shocking incident Tribal Woman Removing Dead Child from Womb Charged 2,000 Rupees

Rajasthan News : राजस्थान के इस अस्पताल का अमानवीय चेहरा। बांसवाड़ा में महात्मा गांधी राजकीय जिला अस्पताल में काम कर रहे कर्मियों ने हद कर दी। जिला अस्पताल में इलाज के नाम पर पैसा वसूली के खेल में एक के बाद एक परतें खुलती जा रही हैं। विभागीय जांच चल ही रही है, वहीं पत्रिका की पड़ताल में अमानवीयता का एक हैरतअंगेज प्रकरण सामने आया।

गत 24 फरवरी को एक गर्भवती आदिवासी महिला के पेट में बच्चा मृत था, जिसकी डिलीवरी कराने के नाम पर भी दो हजार रुपए लेने से कार्मिक नहीं चूके। बच्चा मृत पैदा हुआ, जो बुआ के हाथ में था। कुछ मिनट पहले जन्में बच्चे को एक हाथ में लेकर बुआ खड़ी रही, वहीं दूसरे हाथ से उसे मजबूरी में एमसीएच विंग के कार्मिक को मांगे गए 2000 रुपए देने पड़े। यह वाकया मानवता को तार-तार कर गया। पत्रिका में लगातार प्रकाशित खबरों से हरकत में आए विभाग की टीम इस केस में भी छानबीन कर रही है।

पत्रिका की खबरों से जागा विभाग

राजस्थान पत्रिका में लगातार समाचार प्रकाशित होने के बाद वसूली के मामलों की जांच के लिए स्थानीय व जयपुर से आई टीम ने जांच की। एमसीएच विंग में जांच भी हुई, लेकिन अभी तक टीम पैसे लेने वाले तक नहीं पहुंच पाई। कमेटी अभी तक सिर्फ प्रथम दृष्टया किसी स्टूडेंट द्वारा पैसे लेने की बात कह रही है।

हमें बच्चे की मौत का सदमा, वे मांगते रहे दो हजार

प्रसूता की ननद ललिता ने बताया कि हम एक हजार रुपए देने को तैयार थे। हमें नहीं पता था कि बच्चा पेट में मर गया। कुछ देर बाद हुए प्रसव में बच्चा मरा पैदा हुआ। यह जानकर दुख का पहाड़ टूट गया, क्योंकि उसका भाई उससे बहुत छोटा है। कई बरस बाद घर में बच्चा हुआ, वह भी मृत। इन हालात में भी हम पर दबाव बनाकर पूरे दो हजार रुपए लिए गए। ललिता ने बताया, भतीजे का शव हाथ में था, मैंने दूसरे हाथ से पैसे दिए।

सोमवार को परिजनों को बुलाकर कराएंगे पहचान

पूर्व में परिजनों से पहचान कराई, जिसमें ट्रेनी नर्सिंग स्टूडेंट्स द्वारा पैसा लेने की बात आई। कुछ स्टूडेंट रीट के सिलसिले में बाहर गए थे। सोमवार को परिजनों को बुलाकर पहचान कराएंगे।
डॉ. राहुल डिंडोर, डिप्टी सीएमएचओ और जांच अधिकारी, बांसवाड़ा

उपचार की परवाह कम, वसूली की ज्यादा

प्रसूता के परिजनों से बातचीत में सामने आया कि उपचार देने से ज्यादा पैसा वसूलने पर जोर था। प्रसूता के पति कल्पेश ने बताया कि वह वार्ड के बाहर बैठा था। पुरुषों को अंदर जाने की मनाही थी। अंदर उसकी बहन पत्नी के साथ थी। थोड़ी देर में बाहर आई बहन ने दो हजार रुपए मांगे। बहन ने उसे बताया कि अंदर डॉक्टर (अधिकांश ग्रामीण अस्पताल में नर्सिंग स्टॉफ व स्टूडेंट को भी डॉक्टर ही बोलते हैं) दो हजार रुपए मिलने के बाद ही प्रसव कराएंगे। इस पर कल्पेश ने बहन को दो हजार रुपए दिए।

Updated on:
02 Mar 2025 10:12 am
Published on:
02 Mar 2025 10:12 am