
Banswara : बांसवाड़ा. हौसले की सवारी साइकिल बनी और मंजिल पूरा देश। चिड़ियावासा गांव के युवा सचिन कलाल ने दृढ़ इच्छाशक्ति और धार्मिक आस्था लेकर साइकिल से अखंड भारत यात्रा का संकल्प पूरा किया। 232 दिनों की इस यात्रा में सचिन करीब 17,250 किलोमीटर का सफर तय कर चुके हैं। अब 11 नवंबर को वह गृह जिले बांसवाड़ा में लौटेंगे। सचिन ने इस सफर में हजारों किमी की दूरी तो तय की ही, बल्कि देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का उनका जरिया भी बनी। उन्होंने चार धाम बद्रीनाथ, द्वारकाधीश, रामेश्वरम और जगन्नाथपुरी के दर्शन किए। पहुंचकर भगवान शिव के प्रति इसके अलावा 13 ज्योतिर्लिंगों तक अपनी आस्था प्रकट की। साइकिल पर बैठ सचिन शिरडी साई बाबा, तिरुपति बालाजी, काशी विश्वनाथ, नेपाल के पशुपतिनाथ और मां पावागढ़ काली सहित देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचे। सचिन बताते हैं कि इस दौरान मौसम की चुनौतियों, लंबी दूरियों और दुर्गम रास्तों के बावजूद वह रुके नहीं।
लगातार 232 दिनों तक साइकिल से हजारों किलोमीटर का सफर आसान नहीं रहा। उन्होंने शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखा। 11 नवंबर को सचिन अपने घर चिड़ियावासा लौटेंगे। इसे लेकर परिवार ही नहीं, क्षेत्रवासियों में भी उत्साह है।
एक पुराने साक्षात्कार में सचिन कलाल ने बताया कि पैसे की कभी मुझे इतनी अधिक जरूरत नहीं पड़ी। खाना तो मैं खुद ही बनाकर खा लेता हूं। हां, ये तो है कि मुझे लोगों की तरफ से हमेशा सहायता मिलती रहती है। नेपाल में 25 दिन तक वहां की जनता ने ही सारा खर्चा बर्दाश्त किया। चाहे खाना हो या रहना, सभी नेपाल की जनता की मदद से ही संभव हुआ है। भारत में भी कई जगह लोगों ने मदद की है और करते हैं। बाकी मेरे पास रहने के लिए अपना टेंट है। खाना मैं बना लेता ही हूं।
जब उनसे पूछा गया कि इस यात्रा का मकसद क्या है? तो उन्होंने बताया कि फिटनेस और नशे के खिलाफ यह अभियान है। जब से मैंने यह साइकिल यात्रा शुरू की है मैंने अनुभव किया है कि मैं अपने को फिट महसूस करता हूं। मेरा मानना है कि हर व्यक्ति को रोजाना करीब 20 किमी साइकिल चलानी चाहिए। साथ नशा शरीर को खराब कर देता है, इसलिए नशे से दूर रहें।