Barabanki News : बाराबंकी की विशेष अदालत ने 14 साल पुराने रेप और SC/ST एक्ट मामले में युवक को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। कोर्ट ने झूठा केस दर्ज कराने वाली महिला के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए।
Barabanki News : बाराबंकी में कानून का दुरुपयोग और लंबे समय के इंतजार के बाद अदालत ने फैसला सुनाया है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी की एक विशेष अदालत ने बलात्कार और SC/ ST एक्ट के एक पुराने मामले में युवक को पूरे सम्मान के साथ बरी कर दिया है।
यह पूरा मामला साल 2011 में लखनऊ के विकास नगर थाने में एक दलित युवती ने विल्सन सिंह पर रेप का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन अदालत में सामने आया कि यह मामला सिर्फ 14 हजार रुपये के लेन-देन के कारण हुआ। विल्सन सिंह उस समय बाराबंकी पुलिस विभाग में तैनात एक हेड कांस्टेबल शरद श्रीवास्तव की गाड़ी चलाता था। विल्सन के अपने मालिक पर 14 हजार रुपये बकाया थे।
विल्सन की मां बीमार हुई और उसे इलाज के लिए पैसों की सख्त जरूरत पड़ी, तो वह अपने हक के पैसे मांगने हेड कांस्टेबल श्रीवास्तव के पास गया। मदद करने के बजाय हेड कांस्टेबल ने उसे जेल भिजवाने की धमकी देने लगा। आपसी दुश्मनी निकालने के लिए हेड कांस्टेबल ने अपने ही घर में काम करने वाली युवती का इस्तेमाल किया और विल्सन के खिलाफ बलात्कार जैसा गंभीर आरोप लगाकर झूठे मामले में फंसा दिया गया।
यह केस लगभग 14 सालों तक चला लेकिन अंत में सच्चाई की जीत हुई। विल्सन के वकील गंधर्व गौड़ ने कोर्ट में यह साबित कर दिया कि युवती का बयान सच नहीं है और मेडिकल रिपोर्ट में भी बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई थी। न्यायाधीश हुसैन अहमद अंसारी ने मामले की गहराई को समझते हुए कहा कि किसी को भी सजा देने के लिए सबूतों का ठोस होना बहुत जरूरी होता है, जो इस केस में बिल्कुल गायब थे। कोर्ट ने कहा कि यह केस केवल पैसे ना देने और विल्सन को फंसाने की एक सोची- समझी साजिश रची गई थी।
अदालत ने केवल विल्सन को बेगुनाह मानकर बरी ही नहीं किया, बल्कि झूठा केस करने वाली महिला के खिलाफ धारा 344 CrPC के तहत कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। यह फैसला समाज को यह संदेश देता है कि कानून किसी को परेशान करने या निजी दुश्मनी निकालने का जरिया नहीं है। 14 साल तक बेगुनाह होने के बावजूद समाज का ताना और अदालती चक्कर काटने के बाद यह फैसला विल्सन के जीवन में नई शुरुआत लेकर आएगा।