
सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को कोर्ट से राहत, जमानत मिलने के बाद जेल से होंगे रिहा (फोटो सोर्स : WhatsApp Court News Group)
SP National Spokesperson Manoj Yadav Granted Bail by SC/ST Court: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को बड़ी कानूनी राहत मिली है। बाराबंकी की विशेष एससी/एसटी अदालत ने उन्हें जमानत दे दी है। कोर्ट के आदेश के बाद अब उनकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। यह मामला पिछले कई दिनों से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा का केंद्र बना हुआ था।
बाराबंकी की विशेष एससी/एसटी कोर्ट के जज निशित राय ने मामले की सुनवाई करते हुए मनोज यादव की जमानत अर्जी स्वीकार कर ली। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पाया कि मामले की जांच जारी रहते हुए आरोपी को जमानत दी जा सकती है। कोर्ट के आदेश के बाद जेल प्रशासन को रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। उम्मीद है कि सभी औपचारिकताएं पूरी होते ही मनोज यादव जेल से बाहर आ जाएंगे।
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज यादव को 13 फरवरी को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था। उनके खिलाफ बाराबंकी जिले के सफदरगंज थाने में एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया और कोर्ट में पेश किया था, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मनोज यादव पर लगाए गए आरोप सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़े थे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनके द्वारा की गई टिप्पणी या व्यवहार से अनुसूचित जाति वर्ग की भावनाएं आहत हुईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। इस कानून के तहत दर्ज मामलों में गिरफ्तारी और जांच प्रक्रिया अपेक्षाकृत सख्त मानी जाती है। हालांकि, बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आरोप राजनीतिक परिस्थितियों से प्रेरित हैं और जांच में सहयोग किया जा रहा है।
मनोज यादव की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत में कहा कि आरोपी का स्थायी निवास है,वह फरार होने की संभावना नहीं रखते। जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें अनावश्यक रूप से फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उन्हें न्यायिक राहत मिलनी चाहिए।
अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामला संवेदनशील प्रकृति का है और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अदालत से जांच प्रभावित होने की आशंका जताई। हालांकि, अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए जमानत मंजूर कर ली।
सूत्रों के अनुसार अदालत ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी लगाई हैं,जांच अधिकारी को सहयोग करना होगा। बिना अनुमति क्षेत्र नहीं छोड़ेंगे। किसी गवाह या शिकायतकर्ता को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे। अदालत की अगली सुनवाई में उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। इन शर्तों का पालन करना आरोपी के लिए आवश्यक होगा।
जमानत की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। बाराबंकी और लखनऊ सहित कई जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने फैसले का स्वागत किया। कई नेताओं ने इसे न्यायपालिका पर विश्वास की जीत बताया और कहा कि अदालत ने तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाया है।
मनोज यादव की गिरफ्तारी और जमानत को लेकर प्रदेश की राजनीति में लगातार चर्चाएं चल रही थीं। विपक्षी दलों और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी देखने को मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले समय में राजनीतिक बहस का विषय बना रह सकता है, क्योंकि इसमें कानून, राजनीति और सामाजिक संवेदनशीलता तीनों पहलू जुड़े हुए हैं।
हालांकि जमानत मिलने के बाद मनोज यादव को तत्काल राहत मिल गई है, लेकिन मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है। पुलिस जांच जारी रहेगी और चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में नियमित सुनवाई होगी। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जमानत का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं होता, बल्कि यह केवल जांच और सुनवाई के दौरान अस्थायी राहत होती है।
एससी/एसटी एक्ट सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है। इस कानून के तहत दर्ज मामलों को गंभीरता से लिया जाता है और पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने का अधिकार होता है। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में न्यायिक संतुलन बेहद जरूरी होता है ताकि पीड़ित को न्याय मिले और किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का भी हनन न हो।
Published on:
22 Feb 2026 04:15 am
बड़ी खबरें
View Allबाराबंकी
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
