Baran News: कूनो से बारां पहुंचे चीतों के बाद राजस्थान में चीता कॉरिडोर योजना को गति मिली है। बारां के जंगलों को चीतों के लिए उपयुक्त मानते हुए यहां बसाने की मांग भी उठी है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
Baran News: पुरामहत्व और धार्मिक पर्यटन के साथ बारां जिला अब चीतों के आवासीय गलियारे के रूप में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। हाल के दिनों कूनो के चीते केपी-2 और केपी-3 दो भाई करीब 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय कर राजस्थान के बारां जिले के रामगढ़ और मांगरोल क्षेत्र के जंगलों तक पहुंचे थे। केपी-2 कई दिनों बारां जिले में रहने के बाद कोटा की ओर रुख कर गया वहीं केपी-3 भी कुछ दिन रुकने के बाद वापस एमपी सीमा में चला गया।
इससे पहले भी केपी-2 बारां जिले के रामगढ़ क्षेत्र में आ चुका है। इससे राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच प्रस्तावित अंतरराज्यीय चीता कॉरिडोर योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है और इसे गति मिलने की संभावना प्रबल हो गई है। इतना ही नहीं, पर्यावरण प्रेमी तो बारां जिले में ही चीता बसाने की मांग उठा रहे हैं। हाल ही में कूनो में मादा चीता 'ज्वाला' ने पांच शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही कूनो में चीतों की संख्या बढ़कर करीब 50 हो गई है।
सितंबर 2022 - नामीबिया से 8 चीते लाकर कूनो में छोड़े गए।
फरवरी 2023 - दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए।
2023 - कूनो में चीतों का प्रजनन शुरू हाल ही में मादा चीता 'ज्वाला' ने 5 शावकों को जन्म दिया। वर्तमान कूनो के चीते राजस्थान के बारां क्षेत्र तक पहुंचे है। अब अगला कदम- राजस्थान-मध्यप्रदेश के बीच चीता कॉरिडोर विकसित करना है।
इसका कुल क्षेत्रफल 17,000 वर्ग किमी है। जिसमें से मध्यप्रदेश में 10,500 वर्ग किमी और राजस्थान में 6,500 वर्ग किमी रहेगा। कूनो पार्क चीतों का प्रजनन केंद्र बन रहा है। 36 महीने में 10वां सफल प्रजनन हुआ है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार चीते स्वभाव से बड़े क्षेत्र में विचरण करने वाले जीव होते हैं। युवा नर चीते नया क्षेत्र तलाशने के लिए लंबी दूरी तय करते हैं। कूनो से राजस्थान के जंगलों तक पहुंचना इसी प्राकृतिक व्यवहार का हिस्सा माना जा रहा है। इसके अलावा यहां का अर्ध-शुष्क वातावरण, खुले घास के मैदान और झाड़ीदार जंगल इनके मूल अफ्रीकी आवास के बहुत करीब हैं। कूनो के घने जंगलों के विपरीत बारां का खुला परिदृश्य नामीबियाई चीतों को शिकार करने और दौड़ने के लिए बेहतर जगह प्रदान करता है।
अब आबादी बढ़ने के साथ चीतों को बड़े प्राक्रतिक आवास की आवश्यकता होगी। इसी कारण अंतरराज्यीय कॉरिडोर की योजना में बारां जिले के जंगलों की महत्वपूर्ण भूमिका हो गई है।
चीतों के दीर्घकालीन संरक्षण को ध्यान में रखते हुए राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच करीब 17 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में एक बड़ा वन्यजीव कॉरिडोर विकसित करने की योजना प्रस्तावित की गई थी। इस कॉरिडोर के माध्यम से कूनो से निकलने वाले चीतों को मध्यप्रदेश के गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य और आगे राजस्थान के विभिन्न जंगलों तक सुरक्षित आवागमन का प्राकृतिक मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा।
प्रस्तावित कॉरिडोर में राजस्थान के कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़, सवाई माधोपुर, करौली और चित्तौडगढ़ आदि को शामिल किया गया है।