Good News: राजस्थान के बारां जिले में किसानों के लिए बड़ी सिंचाई परियोजना की तैयारी शुरू हो गई है। किशनगंज क्षेत्र की बरनी और दुबराज नदी पर करीब ₹1850 करोड़ की लागत से बांध बनाया जाएगा।
Rajasthan Development: राजस्थान के बारां जिले के किशनगंज क्षेत्र में किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। क्षेत्र की बरनी एवं दुबराज नदी पर करीब 1850 करोड़ रुपए की लागत से बांध निर्माण की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना के जरिए जल संग्रहण कर क्षेत्र के 46 गांवों की करीब 9 हजार 800 हैक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है और अब इसे जल्द ही अग्रिम कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा।
डीपीआर तैयार होने के बाद बारां के किशनगंज-शाहाबाद विधानसभा क्षेत्र के लोगों में नई सिंचाई परियोजनाओं को लेकर उम्मीद जगी है। क्षेत्र के किसान लंबे समय से सिंचाई सुविधाओं के विस्तार की मांग कर रहे थे। जल संसाधन विभाग की ओर से अब इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। हाल ही में विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने विभागीय अभियंताओं को नई सिंचाई परियोजनाओं की डीपीआर प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
इसी क्रम में जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता जितेंद्र शेखर ने अभियंताओं की टीम के साथ नाहरगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित बरनी एवं दुबराज नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने तैयार की गई डीपीआर का अवलोकन किया और परियोजना से जुड़ी तकनीकी जानकारियां लीं।
अधीक्षण अभियंता शेखर ने बताया कि वर्ष 2024-25 के मुख्यमंत्री बजट घोषणा के तहत इस परियोजना के सर्वे एवं डीपीआर तैयार करने के लिए 50 लाख रुपए की स्वीकृति जारी की गई थी। इसके बाद संवेदक एजेंसी के माध्यम से सर्वे कर डीपीआर तैयार करवाई गई है। परियोजना के तहत नदी पर बांध बनाकर बड़े स्तर पर जल संग्रहण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की हजारों हैक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
वहीं जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए अन्य क्षेत्रों में भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। केलवाड़ा एवं समरानिया क्षेत्र के करीब 79 गांवों की 15 हजार हैक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए सर्वे एवं डीपीआर तैयार करने हेतु संबंधित एजेंसी को 1 करोड़ 92 लाख रुपए का कार्यादेश जारी किया गया है। एजेंसी आगामी छह माह में डीपीआर तैयार कर विभाग को सौंपेगी। इसमें मौजूदा बांधों की क्षमता बढ़ाने और नए बांध विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन किया जाएगा।