बारां

Baran: राजस्थान का ये जिला बनेगा भारत के बिजली उत्पादन का हब, ये बड़ा ग्रुप भी करेगा 18,000 करोड़ रुपए का निवेश

Big Good News: बारां जिले के कवाई और छबड़ा में नई इकाइयों की स्थापना को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही यहां पर इनका निर्माण शुरू हो जाएगा।
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Sep 26, 2025
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NTPC बिजलीघर के परिसर में स्थित सोलर परियोजना के पैनल (फोटो: पत्रिका)

Rajasthan News: जल्द ही बारां जिला प्रदेश में ही नहीं बल्कि देशभर में बिजली उत्पादन में अपनी पहचान बना लेगा। यहां पर स्थापित 7 बिजली परियोजनाओं की फिलहाल 4161.4 मेगावाट उत्पादन क्षमता है।

कवाई और छबड़ा में नई इकाइयों की स्थापना को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही यहां पर इनका निर्माण शुरू हो जाएगा। कवाई में 800-800 मेगावाट की दो और छबड़ा में 660-660 मेगावाट की इकाइयां लगेंगी। दोनों जगह के लिए जनसुनाई की जा चुकी है। जल्द ही पर्यावरण मंजूरी के बाद यहां निर्माण शुरू हो जाएगा। इनके चालू होने के बाद जिले के बिजलीघरों की कुल उत्पादन क्षमता सात हजार मेगावाट से अधिक हो जाएगी। इस प्रकार से बारां जिला प्रदेश में बिजली उत्पादन का सिरमौर बन जाएगा।

फोटो: पत्रिका

कवाई पावर प्लांट

अदानी पावर प्लांट 11 वर्षों से 1320 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है। प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को लेकर सरकार ने यहां अब 800-800 मेगावाट की चार इकाइयां और लगाने को मंजूरी दी है। यहां अगर चार इकाइयां और लगती है तो 3200 मेगावाट उत्पादन के साथ अब कस्बे में स्थापित अदानी पावर प्लांट 4520 मेगावाट बिजली का उत्पादन अकेले करेगा। यह प्रदेश में अव्वल होगा।

इससे पहले सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करने का खिताब छबड़ा सुपर थर्मल पावर प्लांट के पास है। कवाई बिजली प्लांट की उत्पादन क्षमता 1320 मेगावाट हैे। जो 660-660 मेगावाट की दो युनिट से बिजली बनाता है। यह सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट है। तत्काल कनेक्टिविटी के लिए, कवाई के पास 1500 मीटर लंबी हवाई पट्टी है।

अदानी पावर कवाई बिजली संयंत्र का विस्तार करने की योजना बना रही है, जिसके लिए वह 18,000 करोड़ रुपए तक का निवेश करेगी, जिससे संयंत्र की वर्तमान क्षमता तीन गुनी से भी अधिक हो जाएगी।

छबड़ा पावर प्लांट

राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम के छबड़ा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट और छबड़ा सुपर क्रिटिकल थर्मल तापीय विद्युत गृह की बिजली उत्पादन क्षमता वर्तमान में 2320 मेगावाट है। इससे यह प्रदेश में सर्वाधिक बिजली उत्पादन की इकाई बन गया है।

इन सभी इकाइयों से प्रतिदिन लगभग 500 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन होता है। छबड़ा से करीब 22 किमी दूर मोतीपुरा चौकी के पास छबड़ा थर्मल पॉवर प्लांट स्थित है। यहां 250-250 मेगावाट की चार इकाइयों से बिजली उत्पादन होता है। वहीं सुपर क्रिटीकल की 660-660 मेगावाट की पांचवीं व छठी इकाई से भी निरंतर विद्युत उत्पादन जारी हैं। इस प्रकार प्लांट की कुल क्षमता 2320 मेगावाट बिजली उत्पादन की हो गई है।

छबड़ा थर्मल पावर प्लांट की 250-250 मेगावाट की प्रत्येक इकाई से प्रतिदिन 60 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन होता है। इस प्रकार चारों इकाइयों से दो करोड़ 40 लाख यूनिट बिजली उत्पादन किया जाता है। वही सुपर क्रिटिकल की प्रत्येक इकाई से 130 लाख यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इस प्रकार दोनों इकाइयों की उत्पादन क्षमता 260 लाख यूनिट है।

अंता एनटीपीसी प्लांट

एनटीपीसी अब सोलर प्लांट लगाकर कई मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर रही है। देशभर में इसकी कई जगह उत्पादन इकाइयां हैं। इसी के फलस्वरूप एनटीपीसी अंता में 90 मेगावाट का सोलर प्लांट के साथ मेगावाट क्षमता का ट्रांसफॉर्मर लगाकर बिजली उत्पादन कर रही है। एनटीपीसी अंता सोलर प्लांट में 2 लाख 46 हजार 652 सोलर प्लेट लगी हुई हैं।

यहां 120 एमवीए क्षमता का बिजली ट्रांसफार्मर लगा है। इसमें 90 मेगावाट क्षमता के सोलर प्लांट का काम जनवरी में ही 2021 में प्रारंभ हो गया था। इस प्लांट की कुल लागत 508 करोड़ रुपए के लगभग आई है। यह प्लांट लगभग एनटीपीसी के 406 एकड़ में फैला हुआ है।

सोलर पावर प्लांट से 28 मार्च 2024 को बिजली उत्पादन शुरू कर दिया था। इस सोलर प्लांट से बनने वाली बिजली केरल को दी जा रही है। दरअसल, इसके लिए केरल सरकार का एनटीपीसी से एक करार हुआ है। इसके तहत एनटीपीसी अगले 25 साल तक केरल की राज्य सरकार को बिजली की आपूर्ति करेगी। यहां पर गैस आधारित प्लांट भी है। इसकी उत्पादन क्षमता 419.33 मेगावाट है।

भंवरगढ़ : यहां भूसे से बन रही बिजली

जिले के एकमात्र सरसों के भूसे से बिजली बनाने वाले ओजीपीएल प्लांट से उत्पादित बिजली राज्य सरकार को दी जाती है। प्लांट की स्थापना से ही कस्बे के दर्जनों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध हो रहा है। किसानों द्वारा जिस सरसों के भूसे को कोई उपयोग नहीं होने के कारण वैसे ही आग के हवाले किया जाता था, उसका सदुपयोग अब बिजली बनाने में किया जा रहा है। यहां पास ही 4.4 मेगावॉट का सोलर प्लांट भी लगाया जा रहा है।

प्लांट मैनेजर देवेंद्र सिंह ने बताया कि प्लांट की स्थापना 13 वर्ष पूर्व हुई थी। इसकी कुल उत्पादन क्षमता 8 मेगावाट है। जिसमें प्रतिदिन एक लाख 92 हजार यूनिट विद्युत का उत्पादन होता है। इसकी सप्लाई नेशनल ग्रिड को की जाती है। इसका भुगतान राज्य सरकार करती है। भूसे की आवक फरवरी से मई माह के दौरान होती है। आवक के अनुसार दर तय की जाती है। वैसे अभी दर तीन सौ रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल है। यहां प्लांट की स्थापना के बाद से काफी लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। प्रतिवर्ष वार्षिक रिपोर्ट उद्योग मंत्रालय को भेजी जाती है।

Updated on:
26 Sept 2025 12:44 pm
Published on:
26 Sept 2025 12:44 pm
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