बरेली

रुपयों का लालच देकर 14 लोगों के खुलवाए बैंक खाते, फिर साइबर ठगों को सौंपे; बरेली पुलिस ने जालसाज गैंग का खुलासा

बरेली पुलिस ने एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गया शख्स जालसाज गैंग जुड़ा था और सीधे-साधे लोगों के बैंक खाते खुलवाकर अपने साथियों को सौंप देता था। इसके बदले आरोपी को पैसे मिलते थे।
2 min read
Jul 07, 2026
up news
बैंक खाते खुलवाकर हेरीफेरी करने वाला शातिर गिरफ्तार (फोटो- पत्रिका)

बरेली में सीधे-साधे और मजदूरी करने वाले लोगों को रुपयों का लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाने और फिर उन खातों को साइबर ठगों के हवाले करने वाले एक शातिर आरोपी को साइबर क्राइम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने अपने समेत करीब 14 लोगों के बैंक खाते साइबर गिरोह को उपलब्ध कराए थे, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किया जाता था। पुलिस ने इस मामले में ठगी के 3.54 लाख रुपये पीड़ित को वापस भी दिला दिए हैं, जबकि बाकी रकम की रिकवरी की कार्रवाई जारी है।

साइबर क्राइम थाना प्रभारी धनंजय कुमार पांडे ने बताया कि फरीदपुर निवासी रामप्रताप ने दिसंबर 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी। उनके मुताबिक, एक महिला ने खुद को सेना का अधिकारी बताकर प्रॉपर्टी डील के नाम पर बातचीत शुरू की और भरोसा जीतने के बाद अलग-अलग बैंक खातों में कुल 9 लाख 8 हजार रुपये ट्रांसफर करा लिए।

ठगी का एहसास होने पर पीड़ित ने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया। जांच में कई संदिग्ध खाते सामने आए। पहले एक आरोपी मनीष दास न्यायालय में आत्मसमर्पण कर चुका था, जबकि दूसरे आरोपी चंदन कुमार दास को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। उसे कोर्ट में पेश कर न्यायिक प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया।

₹5 हजार से शुरू हुआ लालच

पूछताछ में चंदन ने बताया कि वह 8वीं तक पढ़ा है और परिवार के साथ गुरुग्राम में मजदूरी करता था। डिलीवरी का काम करते समय उसकी मुलाकात 'राज' नाम के व्यक्ति से हुई, जिसने बैंक खाते खुलवाने पर पैसे देने का लालच दिया। शुरुआत में एक खाता उपलब्ध कराने पर उसे 5 हजार रुपये मिले। इसके बाद उसने बिहार और अन्य राज्यों के मजदूरों के करीब 14 बैंक खाते साइबर गिरोह को उपलब्ध करा दिए। इतना ही नहीं, उसने अपने नाम से भी बैंक खाता खुलवाकर उसकी जानकारी गिरोह को दे दी। बदले में उसे हर महीने रुपये मिलते रहे।

कई बैंकों के खाते गिरोह तक पहुंचाए

आरोपी ने पुलिस पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, यूको बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इंडसइंड बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और आंध्रा बैंक समेत कई बैंकों के खाते गिरोह तक पहुंचाए। बाद में जब खाते बंद होने लगे और पुलिस उसकी तलाश में पहुंची, तब उसे अपने अपराध की गंभीरता का एहसास हुआ। साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 14सी पोर्टल और संबंधित बैंकों के समन्वय से कार्रवाई करते हुए ठगी गई रकम में से 3 लाख 54 हजार रुपये पीड़ित के खाते में वापस करा दिए हैं। बाकी धनराशि वापस दिलाने की कार्रवाई जारी है।

प्रभारी धनंजय पांडे का बयान

साइबर क्राइम थाना प्रभारी धनंजय कुमार पांडे ने बताया कि साइबर अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। जो लोग लालच में आकर अपने बैंक खाते या अन्य लोगों के खाते साइबर ठगों को उपलब्ध कराते हैं, वे भी कानून की नजर में बराबर के आरोपी होते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल नंबर किराये पर या इस्तेमाल के लिए न दें। ऐसा करना उन्हें सीधे साइबर अपराध के दायरे में ला सकता है।