बरेली

ठेकेदार का गड़बड़ घोटाला, सीएम ग्रिड योजना में रास्ते में ही बह गए करोड़ो, प्रेशर बढ़ा तो टेस्टिंग में ही खुल गई क्वालिटी की पोल

करोड़ों रुपये की लागत से शहर को बेहतर पेयजल व्यवस्था देने के लिए शुरू की गई सीएम ग्रिड योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। फेज-1 में बिछाई गई पानी की पाइप लाइनों की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लग रहे हैं।
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May 23, 2026
CM Grid pipeline leakage flooding city road in Bareilly
लीकेज पानी लाइन

बरेली। करोड़ों रुपये की लागत से शहर को बेहतर पेयजल व्यवस्था देने के लिए शुरू की गई सीएम ग्रिड योजना अब सवालों के घेरे में आ गई है। फेज-1 में बिछाई गई पानी की पाइप लाइनों की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। टेस्टिंग के दौरान जैसे ही पानी का प्रेशर बढ़ाया जा रहा है, शहर के अलग-अलग इलाकों में पाइप लाइनें फटने और लीकेज की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालत यह है कि कई स्थानों पर सड़कें पानी से लबालब हो रही हैं और लोगों को रोजाना जल संकट झेलना पड़ रहा है।

शहर के मॉडल टाउन, कुष्ठ आश्रम रोड और स्टेडियम रोड समेत कई इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई दिनों से पानी की सप्लाई बाधित हो रही है। कहीं सड़क के नीचे से पानी रिस रहा है तो कहीं पाइप लाइनें टूटकर सड़क पर पानी बहा रही हैं। इससे आवागमन भी प्रभावित हो रहा है और सड़कें लगातार धंसती जा रही हैं।

खोदाई कर छोड़ दिए गड्ढे, हादसे का खतरा

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि कार्यदायी एजेंसी ने जगह-जगह सड़कें खोदकर काम अधूरा छोड़ दिया है। कई इलाकों में गहरे गड्ढे खुले पड़े हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। लोगों का कहना है कि काम की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। वहीं पूर्व उपसभापति अतुल कपूर ने कहा कि पाइप लाइनों की क्वालिटी बेहद खराब है। टेस्टिंग के दौरान छोड़े जा रहे प्रेशर को लाइनें झेल नहीं पा रहीं और बार-बार क्षतिग्रस्त हो रही हैं। वहीं रवि छाबड़ा ने बताया कि सड़क पर घंटों पानी बहता रहता है। शिकायत के बाद कर्मचारी आते हैं, मरम्मत करते हैं, लेकिन दो दिन बाद फिर वही स्थिति बन जाती है।

व्यापारियों और राहगीरों को भी परेशानी

महेश कुमार शर्मा ने कहा कि लगातार लीकेज की वजह से सड़कें टूट रही हैं और जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। इसका असर दुकानों तक पहुंचने वाले ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया। दिलीप कुमार ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल रही। अगर शुरुआत में सही मॉनिटरिंग होती तो आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। चीफ इंजीनियर मनीष अवस्थी ने कहा कि संबंधित एजेंसी से पानी लीकेज की समस्या के बारे में जानकारी ली जा रही है। मॉनिटरिंग में लगी टीमों से रिपोर्ट मांगी गई है और जहां-जहां समस्या सामने आ रही है, वहां जांच कराई जाएगी।

Updated on:
23 May 2026 02:33 pm
Published on:
23 May 2026 01:59 pm