
बरेली। दीपावली पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपावली की पूजा में कुछ बातों का ध्यान रखने से मां लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।बालाजी ज्योतिष संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित राजीव शर्मा ने बताया कि दीपावली पर महालक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में करने का विधान है आधुनिक मुहुर्त शास्त्र की दृष्टि स्थिर लग्न में महालक्ष्मी पूजन श्रेष्ठ रहता है।
पूजन सामग्री
दीपावली पर पूजा के लिए रोली, मौली, पान, सुपारी, अक्षत (साबुत चावल), गेहूँ, धूप, घी का दीपक, तेल का दीपक, खील, बतासे, शंख (दक्षिणवर्ती हो, तो उत्तम), घंटी, घिसा हुआ चन्दन, लक्ष्मी-गणेश की नई मूर्तियाँ, पान (लक्ष्मी, गणेश एवं सरस्वती का संयुक्त चित्र), दूध, दही, शहद, शर्करा, घृत, गंगाजल, सिन्दूर, नैवेद्य, इत्र, यज्ञोपवीत, श्वेतार्क के पुष्प, शमीपत्र, दुर्वा, सर्वोषधि, पंचपल्लव, अष्टगंध, कमल का पुष्प, गन्ना, हल्दी की गांठ, धनिया, गुड़, वस़्त्र, पुष्पमाला,ऋतुफल, कर्पूर, नारियल, इलाइची, चाँदी का वर्क, दक्षिणा कलश, पांच बड़े दीपक, 21 छोटे दीपक, रूई की बत्तियाँ, धूप पात्र, ताँबे या स्टील का लोटा, थाली, प्लेट, कुछ छोटी कटोरियाँ अथवा दोने इत्यादि। इसके अतिरिक्त चैकी, उस पर बिछाने हेतु, लाल-पीले वस्त्र, बैठने के लिए आसन आदि भी एकत्र कर लेने चाहिए। लक्ष्मीचरण एवं श्रीयंत्र-लक्ष्मी-गणेश उत्कीर्ण सिक्का को भी थाली में पूजन के लिए रख लेना चाहिए।
प्रारम्भिक तैयारी
चैकी पर लाल रेशमी वस्त्र बिछाँए। उस पर रोली से रंगे हुए चावलों से अष्टदल कमल बनाँए। उस अष्टदल कमल पर लक्ष्मी-गणेश जी की नवीन मूर्ति, पान, यंत्र आदि स्थापित करें। एक जलपात्र में जल भर लें तथा अन्य सामग्री को भी उपयुक्त पात्र में सज़ा लें। चन्दन आदि भी तैयार कर लें।
लाल कम्बल या ऊन के आसन को बिछाकर पूर्वाभिमुख, पश्चिमाभिमुख या उत्तराभिमुख बैठें।
पूजन सामग्री रखने का तरीका
स्वयं के बायीं ओर जल से भरा हुआ पात्र, घंटी, धूप तेल का दीपक।
स्वयं के दायीं ओर घी का दीपक, सुवासित जल से भरा शंख किसी थाली या पात्र में रखें।सामने एक थाली मे पूजन सामग्री यथा, रोली, मौली, पुष्प, अक्षत, घिसा हुआ चन्दन, आदि अलग-अलग कटोरी या दोनों में रखना चाहिए। पंचामृत तैयार कर लेना चाहिए। शुद्ध जल एवं गंगाजल या अपने क्षेत्र की पवित्र नदियों का जल भी अलग-अलग पात्र में रख लें। शुद्धजल एवं गंगाजल के पात्र में प्रोक्षण हेतु पान या पुष्प भी रख लें। पूर्णपात्र सहित कलश भी समीप रख लें। समीप ही नैवेद्य एवं ऋतुफल आदि रख लें। लाल चन्दन को तथा दूध-दही को तांबे के पात्र में न रखें।
व्यवसायिक स्थल पर महालक्ष्मी पूजन
व्यवसायिक स्थल पर पूजा करने में तुला, कलम, नए वही खाते, दवात, आदि का पूजन करें एवं देहली विनायक पूजन प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर ’’ऊँ॰ देहली-विनायकाय नम्ः’’ मंत्र से पूजन करने के बाद कलम पूजन वही खाते पूजन, तिजोरी में श्री कुबेर पूजन आदि अवश्य करें। अंत में तराजू एवं मशीन, कम्प्यूटर आदि का पूजन अवश्य करें।