दो दशक पहले शहर में करीब 1300 तालाब थे। जिसमे बारिश का पानी भर जाता था और लोगों को जलभराव की समस्या से नहीं परेशान होना पड़ता था। लेकिन धीरे धीरे 450 से ज्यादा तालाबों पर कब्जे हो गए।
बरेली। शहर में इस समय जलभराव का शोर है। बारिश थमने के बाद भी अभी भी तमाम इलाके ऐसे है जहाँ पर अभी भी पानी भरा हुआ हैं। शहर के हालात ऐसे अचानक ही नहीं हुए है बल्कि समय समय पर हुए तालाबों पर अवैध कब्जों की वजह से लोगों को जलभराव की समस्या से जूझना पड़ रहा है। दो दशक पहले शहर में करीब 1300 तालाब थे। जिसमे बारिश का पानी भर जाता था और लोगों को जलभराव की समस्या से नहीं परेशान होना पड़ता था। लेकिन धीरे धीरे 450 से ज्यादा तालाबों पर कब्जे हो गए। किसी तालाब पर शॉपिंग मॉल बन गया तो किसी पर कॉलोनी खड़ी कर दी गई लेकिन जिम्मेदार आँख बंद करे बैठे रहें।
नहीं हो पाती कार्रवाई
साल दर साल बरेली में जमीन की कीमतें बढ़ती गईं। आज उन जमीन की कीमतें बेशकीमती हैं। यही वजह है कि जब जिसे मौका मिला तालाब को हड़प कर कंक्रीट के जंगल खड़ा कर दिया। कई-कई पूरी कालोनियां तालाबों को सुखा कर बसा दी गईं।लेकिन जिम्मेदार लोगों को भनक तक नहीं लगी। सरकार से भी तालाबों को कब्जा मुक्त कराने के लिए आदेश भी जारी होते रहे लेकिन अफसर गुम हुए तालाब नहीं खोज पाए। दरअसल में इन कोलोनाइजर्स की कई नेताओं का संरक्षण प्राप्त है। वहीं निगम अधिकारियों से भी इनका साठ गांठ है। इससे शहर के करीब एक दर्जन मोहल्ले नरक बन गए हैं। अभी तक बारिश का जो पानी इन तालाबों में जाता था। वह मोहल्लों में ही भरकर रह गया है। इसका एक उदाहरण रेजिडेंसी गार्डन है। सात लाख 56 वर्ग गज जमीन पर कभी तालाब हुआ करता था। जहां अब कालोनी काटी गई है। इस कालोनी में भी जलभराव हो रहा है। यहां के लोगों ने पिछले दिनों हंगामा भी काटा था। सड़क भी जाम की थी।
कई जगह तालाब हुए गुम
शहर में तमाम ऐसी जगह है जहाँ पर तालाब पाट कर कॉलोनी बना दी गई है। विकास भवन के पीछे बनी राधेश्याम इन्क्लेव कॉलोनी तालाब पर बसी हुई है। इसके साथ ही संजयनगर और हजियापुर के तालाब भी गायब हो चुके है और डेलापीर तालाब को लेकर विवाद भी चल रहा है। एक संस्था ने करीब आधे तालाब को पाटकर इसकी बाउंड्री करा दी है। बाहर बोर्ड भी लगा दिया गया है। हालांकि निगम के रिकार्ड के अनुसार यह तालाब उनका है। इस पर किसी प्रकार का कब्जा नहीं किया जा सकता।