झाड़ू-पोंछा और जरी का काम कर पेट पालने वाली बांग्लादेशी महिलाओं की बार-बार विदेश यात्राओं ने पुलिस को चौंका दिया है।
बरेली। झाड़ू-पोंछा और जरी का काम कर पेट पालने वाली बांग्लादेशी महिलाओं की बार-बार विदेश यात्राओं ने पुलिस को चौंका दिया है। गरीब परिवार की यह महिलाएं आखिर विदेश घूमने का खर्च कैसे उठा रही थीं? यही सवाल अब जांच का सबसे बड़ा आधार बन गया है।
पुलिस पूछताछ में मुनारा ने बताया कि वह विदेश में भी आया और सफाई का काम करती है, लेकिन उसका यह जवाब पुलिस के गले नहीं उतरा। पुलिस अब बैंक खातों, एफडी-आरडी समेत सभी वित्तीय दस्तावेज खंगाल रही है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मुनारा ने तीन पासपोर्ट बनवाए। एक अपने नाम से, दूसरा बहन शायरा बानों के नाम से और तीसरा रिन्यू कराया हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि शायरा बानों के नाम वाले पासपोर्ट में भी फिंगर प्रिंट मुनारा के ही मिले।
इतना ही नहीं, महिलाओं ने भारतीय राशन कार्ड और सरकारी योजनाओं का लाभ भी उठाया। जबकि सभी अंगूठा टेक हैं और नाम तक नहीं लिख सकतीं। यह फर्जीवाड़ा किसी बड़े नेटवर्क के शामिल होने की ओर इशारा करता है।
जांच से पता चला है कि मुनारा दर्जनभर से ज्यादा बार विदेश यात्रा कर चुकी है। ज्यादातर यात्राएं बांग्लादेश, दुबई और कुवैत की हुईं। एक ट्रिप पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक खर्च होता है। ऐसे में साफ है कि कोई बड़ा हाथ इनके पीछे है।
पुलिस पूछताछ में मुनारा ने स्वीकार किया कि उसने एक पासपोर्ट जला दिया है। यानी सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तहकीकात में जुटी है। जिन लोगों ने इनके फर्जी दस्तावेज तैयार कराए, उनकी भी तलाश जारी है।
मुनारा का एक बेटा किशोरी से दुष्कर्म के आरोप में जेल जा चुका है जबकि दूसरा बेटा हैदराबाद में काम करता है। बेटी की शादी विदेश में हुई है। ऐसे में पुलिस फंडिंग और नेटवर्क के तार जोड़ने में लगी है।
प्रेमनगर इंस्पेक्टर आशुतोष सिंह ने बताया कि मुनारा बी, सायरा बानो और तस्लीमा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, पासपोर्ट अधिनियम, विदेशी अधिनियम और आधार अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर दी है।