बरेली

दरगाह की नई पहल, उर्स ए रज़वी में नहीं पेश होंगी कपड़ों की चादर, बटेगा आला हजरत का साहित्य

अहसन मियां ने कहा कि कपड़े की चादरों की जगह लोग मज़ार शरीफ पर फूल पेश करे और कपड़े की चादर में आने वाली रकम से आला हज़रत द्वारा लिखी किताबों को लोगो मे तक़सीम करें

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Oct 24, 2018
दरगाह की नई पहल, उर्स ए रज़वी में नहीं पेश होंगी कपड़ों की चादर, बटेगा आला हजरत का साहित्य

बरेली। आला हजरत का 100वां उर्स तीन से पांच नवंबर तक मनाया जाएगा। 100वें उर्स ए रज़वी पर दरगाह आला हजरत की तरफ से नई पहल शुरू होने जा रही है। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ़्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मियां) ने कहा कि उर्स में आने वाले अकीदतमंद और मुरीद आला हजरत की मजार पर कपड़े की चादर पेश करने की जगह आला हजरत द्वारा लिखा साहित्य लोगों की बीच बांटे।

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बैठक में हुआ फैसला

दरगाह से जुड़े नासिर कुरैशी ने बताया कि उर्स ए रज़वी में हर साल जिले का सबसे बड़ा चादरों का जुलूस ठिरियासे आता है इस बार भी 100वें उर्स पर सौ मीटर चादरों का जुलूस प्रस्तावित था। ठिरिया में लंगर कमेटी की हुई बैठक में अहसन मियां ने कहा कि कपड़े की चादरों की जगह लोग मज़ार शरीफ पर फूल पेश करे और कपड़े की चादर में आने वाली रकम से आला हज़रत द्वारा लिखी किताबों को लोगो मे तक़सीम करें ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग आला हज़रत के इल्म को जान सके व लोगो को मज़हब की जानकारी हो।

चढ़ाए जाएंगे फूल

नूरी लंगर कमेटी के गौहर खान व तौसीफ खान ने अहसन मियां के हुक़्म पर ऐलान करते हुए कहा कि 3 नवम्बर को ठिरिया से निकलने वाले जुलूस में फूलों की डलिया पेश की जायेगी और कपड़े की चादर में खर्च होने वाली रकम से जुलूस में किताबे बाँटी जाएगी। यहाँ मौजूद मुफ़्ती जमील और मौलाना बशीर क़ादरी ने भी शहर भर से चादरों के जुलूस लाने वालों से भी अहसन मियां के निर्देश पर अमल करने की अपील की।

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Published on:
24 Oct 2018 05:37 pm
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