
बरेली। धनबल और बाहुबल आज राजनीति की पहचान बन चुका है। तमाम नेता ऐसे भी हैं जो चुनावों में धनबल और बाहुबल के बाद भी सफलता नहीं प्राप्त कर पाते हैं। वहीं कुछ नेता ऐसे भी हैं जो बगैर धनबल व बाहुबल का प्रयोग किए हुए जनता के बीच जाते हैं और जनता उनको सिर आंखों पर बैठाती है। ऐसी ही एक पार्षद हैं उर्मिला देवी। इन्होंने आर्थिक तंगी के कारण बकरी बेच कर 2012 में नगर निगम के पार्षद पद का चुनाव लड़ा और सभी विरोधियों को चित कर दिया।
चुनाव के लिए बकरियों को बेचा
2012 में वार्ड नम्बर सात से उर्मिला देवी ने चुनाव मैदान में उतर कर सबको चौंका दिया। उर्मिला देवी के पति रिक्शा चलाकर और मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। उन्होंने अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन चुनाव में होने वाले खर्च के लिए उनके पास रुपये नहीं थे। जिसके कारण उन्होंने अपनी पांच बकरियों को बेच दिया और पोस्टर बैनर छपवा कर उर्मिला देवी का प्रचार किया। अनपढ़ पति-पत्नी ने चुनाव में दिन रात मेहनत की और मतदाताओं के घर घर जाकर वोट मांगे। उर्मिला देवी ने बताया कि पिछले चुनाव में उनके वार्ड से 23 लोग चुनाव में खड़े हुए थे और उनको करीब 800 वोटों से जीत हासिल हुई थी।
पति की मौत ने तोड़ा हौसला
उर्मिला देवी के चुनाव जीतने पर सबसे ज्यादा खुशी उनके पति को हुई लेकिन ज्यादा दिन तक ये खुशी उनके हिस्से में न रही। चुनाव जीतने के कुछ समय बाद ही उर्मिला देवी के पति बीमार पड़ गए और करीब डेढ़ साल बाद उनकी मौत हो गई। उर्मिला देवी के पास अपने पति के इलाज के पैसे भी नहीं थे, लेकिन नगर निगम के सभी पार्षदों और अफसरों ने चंदा कर उर्मिला के पति का इलाज कराया था।
स्कूल-बारातघर बनाना चाहती हैं
उर्मिला देवी इस बार फिर चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है। उर्मिला देवी का कहना है कि उन्होंने अपने वार्ड में खूब विकास कार्य कराए हैं। अगर वो इस बार सफल होती है तो वार्ड में स्कूल और बारातघर बनवाना चाहती है।