बरेली

शुगर अब सिर्फ बीमारी नहीं, दिमाग पर हमला भी… बरेली के न्यूरोलॉजिस्ट ने दी ये बड़ी चेतावनी

अनियंत्रित डायबिटीज अब केवल शरीर में शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डाल रही है। लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में न रहने पर मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, भूलने की बीमारी और आक्रामक व्यवहार तेजी से बढ़ रहा है।

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May 10, 2026
डॉ. पीके माहेश्वरी

बरेली। अनियंत्रित डायबिटीज अब केवल शरीर में शुगर बढ़ने की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क पर भी गंभीर असर डाल रही है। लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में न रहने पर मरीजों में अवसाद, चिड़चिड़ापन, भूलने की बीमारी और आक्रामक व्यवहार तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि अब परिवार और सामाजिक रिश्तों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। यह बात न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. पीके माहेश्वरी ने रविवार को एसआरएमएस में आयोजित कार्यक्रम में कही।

डॉ. माहेश्वरी ने कहा कि डायबिटीज को शरीर का चोर कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण साफ दिखाई नहीं देते। कई मरीजों को तब बीमारी का पता चलता है जब उन्हें हार्ट अटैक, किडनी फेल होने या मानसिक समस्याएं शुरू हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि रिसर्च में सामने आया है कि लंबे समय तक बढ़ी हुई शुगर मस्तिष्क की रक्त नलिकाओं और रासायनिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे दिमाग की कार्यप्रणाली बिगड़ने लगती है।

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50 की उम्र के बाद बढ़ रहा खतरा

डॉ. माहेश्वरी के अनुसार 50 वर्ष की उम्र पार करने के बाद मरीजों में मानसिक लक्षण अधिक देखने को मिल रहे हैं। लोग छोटी-छोटी बातें भूलने लगते हैं, व्यवहार में बदलाव आने लगता है और कई बार मरीज सामाजिक रूप से असहज महसूस करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि कई मामलों में इसका असर नौकरी और पारिवारिक रिश्तों तक पहुंच रहा है।

रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करें व्यायाम

उन्होंने कहा कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए नियमित व्यायाम, संतुलित खानपान, समय पर दवा और नियमित जांच जरूरी है। लोगों को अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों को ही व्यायाम का हिस्सा बनाना चाहिए। पैदल चलना, घर के काम करना और लंबे समय तक एक जगह बैठने से बचना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।

व्रत-त्योहार में खानपान पर रखें नियंत्रण

डॉ. माहेश्वरी ने व्रत और त्योहारों के दौरान अधिक कार्बोहाइड्रेट और तले हुए भोजन से बचने की सलाह दी। साथ ही मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने और हेलमेट सही तरीके से न पहनने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त दवाएं और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जागरूकता बढ़ने के कारण अब अधिक लोग समय पर इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

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