
बाड़मेर. जिले में साता प्रकरण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी व हलचल थम नहीं रही है। दोनों पक्षों की रैलियों और उनमें तीखे आक्षेपों व बयानों के बाद सांसद सोनाराम चौधरी ने सोमवार को राष्ट्रीय करणी सेना पर निशाना साधते हुए कहा कि जरूरत हुई तो वे किसान सेना या तेजा सेना भी बनाएंगे क्योंकि जहर को जहर ही मारता है। साथ ही उन्होंने कहा कि एेसे लोगों का जनता इलाज कर देगी।
उन्होंने कहा कि साता प्रकरण में एक किसान की मौत हुई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, उप अधीक्षक स्तर पर पांच बार जांच हुई, जिसमें मौत सिर में चोट लगने से होना बताया गया। इस प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट ने भी आरोपितों की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज की, लेकिन जांच बदलवा कर एक निरीक्षक को दिलाई। इसकी जानकारी होने पर उन्होंने गृहमंत्री को बताया और अतिरिक्त महानिदेशक सीआईडी सीबी को जानकारी दी तो उन्होंने जांच बदल दी। इस दौरान लोगों ने 23 अक्टूबर को पहले से ही वीरमाराम के समर्थन में रैली का आह्वान कर दिया था, जिस कारण रैली हुई अन्यथा इसकी कोई जरूरत नहीं थी। इसकी प्रतिक्रिया में 30 अक्टूबर की रैली में शामिल लोगों ने आनंदपालसिंह, चतुरसिंह, हेमसिंह का मामला उठाया, जो गलत है। वे पश्चिमी राजस्थान की शांति को भंग करना चाहते हैं, मैं एेसा नहीं होने दूंगा। अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल गलत है।
जसवंतसिंह भले आदमी, रिश्तेदारों के दबाव में लड़ा चुनाव
पूर्व वित्त, विदेश एवं रक्षामंत्री जसवंतसिंह के खिलाफ चुनाव जीतने वाले सोनाराम चौधरी ने उनकी तारीफ की। सांसद ने कहा कि जसवंतसिंह अच्छे आदमी हैं और मैं दुआ करता हूं कि वे जल्द स्वस्थ हों। उनके साथ मैंने संसद में काम किया। उनको भाजपा चित्तौडग़ढ़, जोधपुर या अन्य कहीं से भी टिकट दे रही थी, लेकिन उन्होंने रिश्तेदारों के दबाव में चुनाव लड़ा।
छत्तीस कौम की बात
सांसद ने कहा कि वे किसी भी जाति की नहीं सभी छत्तीस कौम की बात करते हैं। सभी लोगों ने मिलकर उन्हें चार बार सांसद, एक बार विधायक बनाया। उन्होंने हमेशा न्याय की बात की। कांग्रेस से सांसद होते हुए भी उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ मिलकर सालों पहले बाखासर में हुए लीललाराम प्रकरण की निष्पक्ष जांच करवाई।