
राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर से सटी भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर राष्ट्रीय सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के उद्देश्य से गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आदेश और गृह मंत्रालय की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत सीमा सुरक्षा बल (BSF) और स्थानीय राजस्व प्रशासन ने मिलकर बॉर्डर के 15 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। इस संयुक्त कार्रवाई के तहत गडरारोड और चौहटन क्षेत्र के कई सीमावर्ती गांवों में बने अवैध ढांचों को बुलडोज़र और जेसीबी मशीनों की मदद से पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के तुरंत बाद सरहदी क्षेत्र की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस कार्रवाई की टाइमिंग और इसके पीछे के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे क्षेत्र के सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने का एक प्रयास बताया है।
स्थानीय प्रशासन से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई पूर्व में सुनियोजित तरीके से की गई थी। बाड़मेर के गडरारोड उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मालाणा गांव में 2, हमीरानी गांव में 1 और केरकोरी गांव में 1 अवैध निर्माण को हटाया गया। इसके साथ ही चौहटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बाखासर के समेलो का तला, भलगांव और डेम्बा गांव में भी प्रशासन ने अवैध रूप से चिन्हित किए गए ढांचों को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया।
कार्रवाई से पहले संबंधित क्षेत्र के तहसीलदारों द्वारा इन सभी संपत्तियों और जमीनों का एक विस्तृत भौतिक सर्वे किया गया था। सर्वे के बाद सभी संबंधित भू-स्वामियों और कब्जाधारियों को 18 जून तक का समय देते हुए जमीन खाली करने के कानूनी नोटिस जारी किए गए थे। जब तय समय सीमा यानी 18 जून तक इन ढांचों को स्वेच्छा से नहीं हटाया गया, तो स्थानीय पुलिस, राजस्व टीम और BSF के जवानों ने संयुक्त रूप से मौके पर पहुंचकर कानूनन यह बड़ी कार्रवाई की।
बॉर्डर क्षेत्र के 15 किलोमीटर के अत्यंत संवेदनशील दायरे में हुई इस अचानक तोड़फोड़ के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी असंतोष और आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है। विशेष रूप से एक समुदाय विशेष के लोगों ने इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के प्रति अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज के प्रबुद्ध लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के और बिना पर्याप्त समय दिए इस एकतरफा कार्रवाई को अंजाम दिया है। विरोध जता रहे लोगों का कहना है कि सुदूर सीमावर्ती ग्रामीण अंचलों में लोग सदियों से इसी तरह कच्चे-पक्के आशियाने बनाकर रह रहे हैं, ऐसे में अचानक उन्हें बेघर करना या उनके ढांचों को तोड़ना मानवीय दृष्टिकोण से पूरी तरह अनुचित है।
बाड़मेर में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री और वर्तमान बायतु विधायक हरीश चौधरी ने इस पूरी कार्रवाई के कानूनी पहलुओं और इसके दायरे पर कई तीखे सवाल उठाए। चौधरी ने कहा कि बॉर्डर क्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर लोगों को डराने और परेशान करने का खेल खेला जा रहा है।
हरीश चौधरी ने कहा, "सीमा क्षेत्र में पहले 15 किलोमीटर और बाद में 50 किलोमीटर के दायरे की बात कहकर आम लोगों को पूरी तरह से गैर-संवैधानिक तरीके से नोटिस थमाए जा रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान के इस सरहदी क्षेत्र की असली पहचान यहाँ की अपणायत, भाईचारा और कौमी एकता है। इस ताने-बाने को कमजोर करने के किसी भी राजनीतिक प्रयास को यहाँ की जनता कभी सफल नहीं होने देगी। हम सभी और हमारी पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर हमेशा देश के साथ खड़ी है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर किसी राजनीतिक एजेंडे को यहाँ जबरन लागू करना कतई उचित नहीं है। हमारे पूर्वजों ने देश की रक्षा में अपनी कुर्बानियां दी हैं, इसलिए इस पूरे क्षेत्र के आत्मसम्मान को बनाए रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।"
प्रेस वार्ता में हरीश चौधरी ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वे देश और प्रदेश के वास्तविक तथा बुनियादी गंभीर मुद्दों से जनता का ध्यान पूरी तरह भटकाना चाहती हैं। यही कारण है कि जानबूझकर बॉर्डर क्षेत्र को एक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाया जा रहा है ताकि धरातल के संकटों पर कोई बात न हो सके।
उन्होंने कहा, ''देश का अन्नदाता और सीमावर्ती क्षेत्रों का किसान आज खेती की लगातार बढ़ती लागत, महंगे पेट्रोल-डीजल और खाद की भारी किल्लत व आसमान छूती कीमतों से बुरी तरह परेशान है। प्रदेश के लाखों शिक्षित युवाओं के सामने आज भयंकर रोजगार का संकट खड़ा है। सरकारी भर्तियों की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। हाल ही में देश की बड़ी परीक्षा प्रणालियों में सामने आई भारी अनियमितताओं और धांधली के कारण करोड़ों छात्र-छात्राओं का भविष्य पूरी तरह से अंधकार में लटक गया है। सरकार इन मुद्दों पर पूरी तरह फेल हो चुकी है।''
बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र के वर्तमान सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने भी इस मौके पर उपस्थित रहकर पीड़ित ग्रामीणों की आवाज को मजबूती से उठाया। सांसद बेनीवाल ने कहा कि पिछले 1 से 2 दिनों से उनके पास बॉर्डर के अलग-अलग सुदूर गांवों से लगातार रोते हुए किसानों और ग्रामीणों के फोन आ रहे थे।
सांसद बेनीवाल ने प्रशासनिक तालमेल पर सवाल उठाते हुए कहा, "कुछ लोगों को जो नोटिस दिए गए हैं, उनमें लिखा है कि आपकी अपनी निजी कृषि भूमि में जो धार्मिक स्थल या मकान बने हुए हैं, उन्हें 18 तारीख तक स्वयं हटा लें, अन्यथा प्रशासन उन्हें जबरन गिरा देगा। जब मैंने इस बेहद गंभीर संवेदनशील मामले को लेकर स्वयं बाड़मेर जिला कलेक्टर से सीधी बात की, तो उन्होंने इस पूरी कार्रवाई के संबंध में अपनी अनभिज्ञता जताई। यह बेहद आश्चर्यजनक है कि जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी को ही इस कार्रवाई की पूरी जानकारी नहीं है। जब भी इस देश पर कोई संकट आया या युद्ध की स्थिति बनी, तो इसी बॉर्डर के स्थानीय नागरिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना सेना और देश की सुरक्षा के लिए सबसे आगे खड़े होकर लड़ाई लड़ी है। आज उन्हीं देशभक्त नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।"
इस प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मंत्री गफूर अहमद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह गोदारा, पूर्व जिलाध्यक्ष फतेह खान, चौहटन के पूर्व विधायक पदमाराम मेघवाल, निवर्तमान प्रधान सलमान खान और युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेंद्र कड़वासरा सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।