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Rajasthan Politics : ‘गहलोत राज के 19 पेपर लीक पर राहुल गांधी चुप क्यों?’ BJP का पलटवार, गरमाया सियासी पारा

राहुल गांधी के कोटा दौरे पर राजस्थान में सियासी घमासान। पेपर लीक, NEET परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा-कांग्रेस के शीर्ष नेता आमने-सामने। जानिए किसने क्या कहा।

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Rahul Gandhi Rajasthan Visit Kota NEET Controversy Diya Kumari Govind Dotasra

Politics on Rahul Gandhi Rajasthan Visit

लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बुधवार को हुए राजस्थान दौरे के बाद से सियासी पारा गरमाया हुआ है। खासतौर से राहुल गांधी के कोटा में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से संवाद पर प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हो रहे हैं। राहुल के भाषण के तुरंत बाद भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कमान संभाली और कांग्रेस पर पलटवार किया। आलम ये रहा कि कोटा से लेकर राजधानी जयपुर तक बयानों के तीखे तीर चल रहे हैं। भाजपा जहां कांग्रेस के पिछले शासनकाल के पेपर लीक के काले इतिहास को खंगाल रही है, वहीं कांग्रेस वर्तमान व्यवस्था की कमियों और परीक्षाओं के रद्द होने को लेकर केंद्र सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर रही है।

'गहलोत राज के पेपर लीक पर राहुल गांधी चुप क्यों?: दिया कुमारी

राहुल गांधी के कोटा दौरे और छात्रों के साथ उनकी मुलाकात पर राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बेहद तल्ख लहजे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। डिप्टी सीएम ने कोटा में NEET छात्रों के साथ राहुल गांधी की बातचीत को केवल एक राजनीतिक स्टंट और दिखावा करार दिया है।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सीधे सवाल दागते हुए कहा, "पिछली अशोक गहलोत सरकार के दौरान रिक्रूटमेंट एग्जाम पेपर लीक का एक नया और शर्मनाक रिकॉर्ड बना था, तो उस पूरे कार्यकाल के दौरान राहुल गांधी चुप क्यों थे? उन्होंने तब राजस्थान के पीड़ित युवाओं के हक में एक शब्द भी क्यों नहीं बोला?"

दिया कुमारी ने आगे कहा, "मेरा मानना ​​है कि वह इन मुद्दों पर सिर्फ इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि वह वर्तमान में केंद्र और राज्य दोनों जगह विपक्ष में बैठे हैं। हमारी सरकार के रहते री-एग्जाम पूरी तरह से सही और पारदर्शी तरीके से आयोजित होगा।"

कांग्रेस राज में लाखों युवाओं के सपने टूटे: राजेंद्र राठौड़

भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व एआईसीसी व विधानसभा के वरिष्ठ चेहरा राजेंद्र राठौड़ ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस को बेहद आक्रामक तरीके से घेरा है। राठौड़ ने आंकड़ों का हवाला देते हुए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की साख पर बड़े सवालिया निशान खड़े किए हैं।

राजेंद्र राठौड़ ने अपने बयान में कहा, ''राजस्थान में कांग्रेस के पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान कुल 19 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए। इसके कारण मरुधरा के लाखों होनहार युवाओं के सरकारी नौकरी पाने के सपने पूरी तरह से टूट गए और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।''

उन्होंने कहा, जब यह इतनी बड़ी धांधली लगातार हो रही थी, तब न तो दोषियों पर कोई प्रभावी और कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई और न ही राहुल गांधी ने इस अत्यंत गंभीर मुद्दे पर अपनी ही सरकार से कोई सवाल पूछा। तब राहुल गांधी को राजस्थान के इन रोते हुए युवाओं के भविष्य की चिंता क्यों नहीं सताई?''

राजेंद्र राठौड़ ने दावा किया कि भाजपा सरकार के पिछले ढाई वर्षों के इस कार्यकाल में राजस्थान के भीतर एक भी पेपर लीक की अप्रिय घटना सामने नहीं आई है। वर्तमान सरकार ने सभी भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता बरती है और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है।

देश में अशांति का वातावरण बनाने का प्रयास : डॉ. अरुण चतुर्वेदी

राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने भी राहुल गांधी के इस दौरे को देश को पीछे धकेलने की एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश का हिस्सा बताया है।

डॉ. चतुर्वेदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि कांग्रेस पार्टी के तमाम बड़े नेताओं और स्वयं राहुल गांधी ने कोटा के इस छात्र कार्यक्रम में अपने बयानों के जरिए पूरे देश के भीतर भ्रम और अशांति का एक कृत्रिम वातावरण खड़ा करने का अनुचित प्रयास किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के संवेदनशील युवाओं के भविष्य के साथ केवल अपनी राजनीति चमकाने के लिए खेल रहे हैं और इस प्रकार के बयानों से वे देश की तरक्की को पीछे ले जाने का काम कर रहे हैं।

राहुल गांधी युवाओं की उम्मीद और छात्रों की गूंज: टीकाराम जूली

भाजपा के इन चौतरफा हमलों के बीच राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता टीकाराम जूली ने राहुल गांधी के इस दौरे को एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाला कदम बताया है। जूली ने कहा कि भाजपा सरकार युवाओं के वास्तविक सवालों से पूरी तरह भाग रही है।

टीकाराम जूली ने राहुल गांधी के पक्ष में मजबूती से तर्क देते हुए कहा, "राहुल गांधी इस देश के युवाओं की असली उम्मीद, उनकी बुलंद आवाज और देश भर के छात्रों की अंतरात्मा की गूंज हैं। जिस तरह से वर्तमान भाजपा सरकार युवाओं को लगातार ठगने का काम कर रही है, कभी पेपर लीक हो रहे हैं तो कभी परीक्षाओं को अचानक कैंसिल कर दिया जाता है, सरकार के पास इन बातों का कोई सीधा जवाब नहीं है।"

उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस नाकामी पर इस्तीफा तक नहीं दे रहे हैं। इन्हीं सब जनविरोधी नीतियों के खिलाफ राहुल जी ने कोटा आकर छात्रों से एक ऐतिहासिक और सकारात्मक डायलॉग किया है, क्योंकि आज देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने की बेहद सख्त जरूरत है।

सीटें सिर्फ 80 हजार, गरीब कैसे बनेगा डॉक्टर?: गोविंद सिंह डोटासरा

राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कोटा की कोचिंग इंडस्ट्री के कड़वे सच और देश की ध्वस्त हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद गंभीर और बुनियादी आर्थिक सवाल उठाए हैं। डोटासरा के इस बयान ने इस पूरी राजनीतिक बहस को एक बेहद संवेदनशील मानवीय मोड़ दे दिया है।

डोटासरा ने सिलसिलेवार तरीके से शिक्षा व्यवस्था पर प्रहार करते हुए कहा, 'देश में हर साल 22 लाख से अधिक बच्चे अत्यंत कठिन मानी जाने वाली NEET की परीक्षा में बैठते हैं। इन बच्चों के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार अपनी पूरी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई और जमा पूंजी बच्चों की कोचिंग, महंगे हॉस्टलों के किराए, किताबों और खाने पर पूरी तरह न्योछावर कर देते हैं।पूरे देश के स्तर पर देखा जाए तो मध्यम वर्ग की मेहनत की कमाई का लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपए केवल इन परीक्षाओं की तैयारी के चक्रव्यूह में खर्च हो जाता है। लेकिन इसके विपरीत पूरे देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें महज 80 हजार ही उपलब्ध हैं।'

डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकारी सीटें कम होने के कारण निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस आज 1 से लेकर 2 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। ऐसे में एक गरीब और आम मध्यम वर्ग का मेधावी बच्चा आखिर डॉक्टर कैसे बनेगा? क्या देश में डॉक्टर बनने का सपना सिर्फ बेहद अमीर परिवारों के बच्चों के लिए ही सुरक्षित रह गया है?

उन्होंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र पर भी चिंता जताते हुए कहा कि लाखों युवा बड़ी डिग्रियां लेने के बाद भी भयंकर बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। देश के लगभग 80% इंजीनियर्स के पास उनकी वास्तविक डिग्री के मुताबिक कोई काम ही उपलब्ध नहीं है। ऊपर से यह पूरा सिस्टम पेपर लीक, परीक्षाओं में बड़ी धांधली और सीमित अवसरों के कारण केवल पैसे वालों को ही आगे बढ़ने का मौका दे रहा है। राहुल गांधी इसी गहरी नाइंसाफी और व्यवस्थागत खामियों को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।