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Rajasthan Assembly Session: नए विधेयकों की तैयारी में भजनलाल सरकार, ये पुराने 9 कानून अब भी फाइलों में कैद

Rajasthan Assembly: राजस्थान में विधानसभा के नए सत्र की तैयारियां तेज हैं, लेकिन पहले से मंजूर नौ कानून अब भी कागजों में अटके हैं। इनमें छह कानून सिर्फ अधिसूचना की तारीख तय नहीं होने से लागू नहीं हो पाए हैं।
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Rajasthan Assembly

Rajasthan Assembly (फाइल फोटो पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के नए सत्र की तैयारियां तेज हो चुकी हैं, हो सकता है राज्य सरकार की ओर से इसमें कुछ नए विधेयक भी लाए जाएं। उधर, नौ विधेयक ऐसे हैं, जो विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून का रूप लेने के बावजूद प्रभावी नहीं होने से कागजी बने हुए हैं। इनमें से 5 कानून मौजूदा सरकार के और 3 पूर्ववर्ती सरकार के समय के हैं। इनके अलावा एक कानून ऐसा है, जो 2015 से फाइलों में दबा हुआ है।

हैरानी की बात यह है कि इन कानूनों में से छह के लिए तो संबंधित विभागों को बस एक तारीख अधिसूचित करनी है, पर लगता है राजस्थान सरकार तारीख तय करना ही भूल गई है। इनके अलावा दो विश्वविद्यालयों के लिए इसी साल विधानसभा व राज्यपाल से मंजूरी मिल गई, लेकिन 5 माह बाद भी कुलगुरु नियुक्ति सहित स्थापना की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।

इन कानूनों पर लगा है 'कागजी' ठप्पा

1. राजस्थान तंग करने वाली मुकदमेबाजी (निवारण) अधिनियम, 2015: यह कानून उन लोगों पर लगाम कसने के लिए बनाया गया था जो बेवजह अदालतों में मुकदमे दायर कर कोर्ट का कीमती समय बर्बाद करते हैं।

2. राजस्थान स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम, 2022: यह महत्वाकांक्षी कानून हर प्रदेशवासी को स्वास्थ्य का मौलिक अधिकार देने के लिए लाया गया था।

3. राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम, 2023: यह कानून मजदूरी और सामाजिक सुरक्षा पेंशन के जरिए ह नागरिक को न्यूनतम आय की गारंटी देने के इरादे से बनाया गया था।

4. राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर (रजिस्ट्रीकरण और कल्याण) अधिनियम, 2023: गिग इकोनॉमी में काम करने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का कवच देने वाला यह कानून भी ठंडे बस्ते में है।

5. राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) अधिनियम 2025: यह कानून कोचिंग संस्थानों के पंजीयन और नियमन के लिए लाया गया, जिसका मकसद विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कॅरियर मार्गदर्शन देकर पढ़ाई के तनाव को कम करना था।

6. राजस्थान भू-जल (संरक्षण और प्रबंध) प्राधिकरण अधिनियम, 2024: तेजी से गिरते भू-जल स्तर पर लगाम लगाने के लिए बना यह कानून घरेलू और कृषि उपयोग को छोड़कर अन्य कार्यों के लिए भू-जल दोहन पर प्राधिकरण की अनुमति अनिवार्य करता है।

7. राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान, जयपुरः एम्स की तर्ज पर जयपुर में रिम्स की स्थापना के लिए कानून बन चुका, लेकिन यह संस्थान अब तक शुरू नहीं हो पाया।

8. महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय, जयपुरः खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कानून बनाकर इस विश्वविद्यालय की स्थापना का निर्णय लिया जा चुका, लेकिन अब तक न कुलगुरु नियुक्त हुआ और न ही विवि के स्थान का कुछ पता।

9. राजस्थान आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय, अजमेर: आयुर्वेद, योग व प्राकृतिक चिकित्सा को प्रोत्साहन देने के लिए इस विवि की स्थापना की जानी है, जिसके लिए जगह पहले से ही चिन्हित है। इसके बावजूद अब तक न कुलगुरु की नियुक्ति हुई और न ही अब तक कोई अन्य गतिविधि शुरू हुई है।