बाड़मेर

पीएम मोदी ने किया बाड़मेर रेलवे स्टेशन का लोकार्पण: 1899 में बिछी थी पटरी, पाकिस्तान ने गिराए थे यहां बम

Barmer Railway Station : पहले यह रेलवे स्टेशन टीन छप्पर का रहा। अंग्रेजों का जमाना आया और आजादी मिली तो गोल बिल्डिंग की छतें मिली जो अब बहुत कम जगह पर नजर आती है। 1971 के युद्ध में बाड़मेर के इस रेलवे स्टेशन पर बम बरसाए गए, लेकिन रेल नहीं रोक पाए।
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Jul 17, 2026
Barmer Railway Station
बाड़मेर रेलवे स्टेशन। फोटो पत्रिका नेटवर्क

Barmer Railway Station : बाड़मेर। पहले यह रेलवे स्टेशन टीन छप्पर का रहा। अंग्रेजों का जमाना आया और आजादी मिली तो गोल बिल्डिंग की छतें मिली जो अब बहुत कम जगह पर नजर आती है। 1971 के युद्ध में बाड़मेर के इस रेलवे स्टेशन पर बम बरसाए गए, लेकिन रेल नहीं रोक पाए। 1965 तक इस रेलवे स्टेशन से कराची तक रेल चली। 2005-06 में मीटरगेज से ब्रॉडगेज हुआ। फिर जोधपुर से खोखरापार रेल 2018 तक चली। अब 2026 में यह रेलवे स्टेशन अमृत भारत योजना के तहत देश के आधुनिक रेलवे स्टेशनों में शामिल हो गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार दोपहर वर्चुअल माध्यम से इसका लोकार्पण किया। कार्यक्रम में बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदा राम बेनीवाल,बाड़मेर विधायक डॉ. प्रियंका चौधरी, बायतु विधायक आदूराम मेघवाल और पूर्व मंत्री कैलाश चौधरी मौजूद रहे। करीब सवा सौ साल का यह ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन बाड़मेर शहर की शान बन गया है।

आजादी से पहले 22 दिसंबर 1900 में जोधपुर के तत्कालीन महाराज सरदारसिंह के सुझाव पर सादड़ी, पाली, बालोतरा और बाड़मेर के बीच में एक रेल लाइन बिछाई गई। 60 मील की यह रेल लाइन 15 मई 1899 को पूरी हो गई थी। इसके बाद बाड़मेर से कराची के बीच में 22 दिसंबर 1900 को 74 मील लंबी एक लाइन और जोड़ दी। जानकार बताते हैं कि बाड़मेर में यह स्टेशन 1899 में बन गया था। तब शहर ढाणी बाजार तक सीमित था और आगे पूरा वीरान था।

Barmer Railway Station

1971 में 8-9 दिसंबर को पाकिस्तान ने बमबारी की

बाड़मेर के रेलवे स्टेशन पर 1971 के युद्ध में 8 और 9 दिसंबर को पाकिस्तान ने भारी बमबारी की। रेलवे स्टेशन के पास ही गोदाम में डीजल के ड्रम रखे हुए थे। यदि ये बमबारी की चपेट में आते तो शहर में बड़ा नुकसान होता लेकिन तत्परता से इन डीजल के ड्रम को बाहर ले जाया गया और रेलवे स्टेशन बच गया।

गोल बिल्डिंग में चला कई साल

अंग्रेजों के जमाने में छत का एक नया तरीका था। पत्थर के भवन बनते और इनकी छत गोल होती ताकि इन पर पानी नहीं ठहरे। ठण्डी और गर्म दोनों मौसम में अनुकूल रहे। छत पर किसी तरह का भार नहीं आने से ज्यादा मजबूत रहे। इस तकनीक से ही रेलवे के सारे भवन बनते थे। बाड़मेर का रेलवे स्टेशन भी इसी अंदाज में बनाया गया था और काफी समय तक रहा। तब अम्बर टॉकिज के ठीक सामने टिकट खिड़की व अन्य सुविधाएं थीं।

मीटरगेज से हुआ ब्रॉडगेज

2005-06 में बाड़मेर रेलवे स्टेशन के साथ एक नया अध्याय जुड़ा। तत्कालीन रक्षामंत्री जसवंत सिंह के प्रयास से जोधपुर से मुनाबाव तक मीटरगेज रेलवे पटरी को ब्रॉडगेज में बदल दिया गया। 2005-06 में जब केन्द्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस, नितिशकुमार, जसवंत सिंह यहां आए और बाड़मेर से मालाणी एक्सप्रेस की शुरुआत भी की। इससे बाड़मेर रेलवे स्टेशन को आधुनिक होने का अवसर मिला।

पाकिस्तान से फिर जोड़ा

फरवरी 2006 में जसवंत सिंह के प्रयास से एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच में रेल सेवा प्रारंभ हुई। थार एक्सप्रेस जोधपुर से खोखरापार शुरू हुई तो बाड़मेर रेलवे स्टेशन के साथ ही मुनाबाव का अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन भी बाड़मेर में बना। बाड़मेर अब सुर्खियों में आ गया।

2006 में हुआ था कायाकल्प

2006 में बाड़मेर के रेलवे स्टेशन का कायाकल्प किया गया था। नया भवन बनने के साथ ही कई सुविधाएं, प्लेटफार्म और रेलवे वाशिंग लाइन की सुविधा मिलने से यह नए मॉडल में नजर आया। अमृत भारत योजना के तहत अब 2026 में बाड़मेर शहर की सबसे खूबसूरत इमारतों में बाड़मेर का रेलवे स्टेशन नजर आता है। शहर के प्रवेश द्वार की तरह यह अब शहर के मुख्य बाजार और अहिंसा चौराहे के सामने एक ऐसी शानदार इमारत नजर आती है।

Updated on:
17 Jul 2026 04:24 pm
Published on:
17 Jul 2026 04:01 pm
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