राजस्थान की माटी से निकले एक ऐसे कलाकार, जिनकी आवाज़ में राजस्थान का गौरव और इतिहास बोलता है, वह हैं छोटू सिंह रावणा। बाड़मेर के एक छोटे से गाँव से निकलकर आज देश-दुनिया में अपनी गायकी का लोहा मनवाने वाले छोटू सिंह की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। हाल ही में विधायक रविंद्र सिंह भाटी के साथ हुए विवाद के बाद वे चर्चा में हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक सफल गायक बनने से पहले वे क्रिकेट के मैदान पर चौके-छक्के लगाया करते थे?
राजस्थान की लोक संस्कृति और भजन गायकी के क्षेत्र में छोटू सिंह रावणा आज एक जाना-पहचाना नाम हैं। 4 अक्टूबर 1996 को बाड़मेर की शिव तहसील के कोटड़ा गाँव में जन्मे छोटू सिंह ने बेहद कम उम्र में वह मुकाम हासिल किया है, जो कई लोगों के लिए ताउम्र एक सपना होता है। लेकिन उनकी यह सफलता रातों-रात नहीं आई, इसके पीछे संघर्ष, जुनून और एक बड़ा फैसला छिपा है।
आइए जानते हैं छोटू सिंह रावणा के जीवन से जुड़ी 10 बड़ी और अनसुनी बातें, जो आपको हैरान कर देंगी:
आज जिन्हें आप मंच पर भजन गाते हुए देखते हैं, वे कभी क्रिकेट की पिच पर पसीना बहाते थे। छोटू सिंह रावणा को बचपन में संगीत से कहीं ज्यादा लगाव क्रिकेट से था। एक समय ऐसा भी था जब उन्होंने क्रिकेट पर फोकस करने के लिए गायकी से पूरी तरह दूरी बना ली थी।
छोटू सिंह ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें बचपन से ही गुनगुनाने का शौक था। वे जब गाँव की गलियों से गुजरते थे, तो गाना गाते हुए निकलते थे। स्कूल के हर कार्यक्रम में वे गायन में हिस्सा लेते थे, जिससे धीरे-धीरे उनका रुझान वापस संगीत की ओर बढ़ा।
छोटू सिंह रावणा के करियर में सबसे बड़ा मोड़ राजस्थान के कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर के बाद आया, जब उन्होंने अपना पहला गाना "बोली-बोली हैं तलवारें" रिलीज किया। यह गाना इतना वायरल हुआ कि छोटू सिंह रातों-रात राजस्थान के घर-घर में पहचाने जाने लगे।
डेब्यू सॉन्ग के बाद उन्होंने चित्तौड़गढ़ की महारानी पद्मावती के शौर्य पर आधारित गीत गाए। इन गीतों ने उन्हें विशेष रूप से क्षत्रिय समाज और इतिहास प्रेमियों के बीच 'यूथ आइकन' बना दिया।
छोटू सिंह रावणा अध्यात्म में गहरी रुचि रखते हैं। उन्होंने खुद बताया है कि उन्हें जीवन में कई बार भगवान के दर्शन और ईश्वरीय शक्ति का अनुभव हुआ है। उन पर माँ भगवती की विशेष कृपा मानी जाती है, और यही कारण है कि उनके भजनों में एक अलग ही ऊर्जा महसूस होती है।
उनके भजन न केवल भक्ति भाव से भरे होते हैं, बल्कि राजस्थानी संस्कृति को भी जीवंत करते हैं। उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध गाने हैं: (यूट्यूब पर टॉप-3 गाने)
तीन बाण के धारी - 235 मिलियन व्यूज़
म्हारो सेठ रुखालो - 102 मिलियन व्यूज़
लीलण प्यारी - 37 मिलियन व्यूज़
छोटू सिंह ने राजस्थान के बड़े नामी कलाकारों के साथ काम किया है। इनमें प्रकाश माली, गीता रबारी, परमेन और प्रकाश दास जी महाराज जैसे नाम शामिल हैं। उनके जुगलबंदी वाले कार्यक्रमों को लोग घंटों तक बैठकर सुनते हैं।
अजब सिंह और कमला देवी के घर जन्मे छोटू सिंह का परिवार एक साधारण ग्रामीण परिवार है। वे कुल 5 भाई-बहन हैं। स्नातक तक की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह से संगीत को ही अपना पेशा बना लिया।
इतनी शोहरत मिलने के बाद भी छोटू सिंह बेहद सादगी भरा जीवन जीते हैं। वे अक्सर माउंट आबू की पहाड़ियों में साधना के लिए जाते हैं। युवाओं को नशे से दूर रहने और अपनी संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा देना उनकी प्राथमिकता रही है।
यूट्यूब पर 2.62 मिलियन (26 लाख से ज्यादा) सब्सक्राइबर्स के साथ वे राजस्थान के सबसे सफल डिजिटल कलाकारों में से एक हैं। इंस्टाग्राम पर भी उनके 1.4 मिलियन फॉलोअर्स उनकी लोकप्रियता की गवाही देते हैं।