
बाड़मेर. बाड़मेर जिला कारागृह की जमीन पर हुए अतिक्रमण डेढ़ साल बाद भी नहीं हट पाए हैं। यहां जेल की जमीन पर वर्षों पहले अतिक्रमियों ने अतिक्रमण कर कच्चे-पक्के मकान बना लिए हैं। जेल की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने डेढ़ साल पहले जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला कलक्टर को अतिक्रमण हटाने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद अतिक्रमण नहीं हट पाए हैं।
दो साल पहले केन्द्रीय कारागार, जोधपुर में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदी भंवरलाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जेल की जमीन पर हुए अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। मुख्य न्यायधीश ने इस पत्र को जनहित याचिका के रूप में दर्ज करते हुए एडवोकेट दिनेश बोथरा को न्याय मित्र नियुक्त किया था। न्याय मित्र ने मौका रिपोर्ट तैयार कर न्यायालय के सामने पेश की थी।
आठ बीघा जमीन पर अतिक्रमण
न्याय मित्र की ओर से अगस्त2016 में हाईकोर्ट में प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 1967 में बाड़मेर जेल को 32 बीघा जमीन आवंटित की थी, जिसकी चारदिवारी नहीं होने के कारण 1980 के बाद कई लोगों ने जेल के लिए आवंटित जमीन पर अतिक्रमण कर लिया। जेल की आठ बीघा जमीन पर 29 लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है।
फैक्ट फाइल
जेल की कुल जमीन - 32 बीघा
अतिक्रमित जमीन - 8 बीघा
ओपन जेल में बंदी - 37
ओपन जेल के आवास - 10
जेल भवन में कैदी - 05
जेल भवन में बंदी - 212
जेल भवन में बंदियों की क्षमता- 159
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पंचायत सहायकों का धरना जारी
बाड़मेर राजस्थान पंचायत सहायक संघ व वंचित विद्यार्थी मित्र शिक्षक संघ की 4 सूत्री मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को पांचवें दिन जारी रहा। संघ जिलाध्यक्ष हुकमाराम जाखड़ ने बताया कि सरकार की ओर से जल्द मांगे नहीं माने जाने पर प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। इस मौके पर पेमाराम सारण, भूपेश जोशी, हनुमानराम सारण, उत्तमदान चारण, दिनेश, गौतम सोनी, उदाराम, रामाराम आदि मौजूद रहे।