पचपदरा स्थित राजस्थान रिफाइनरी में सोमवार को एक्सचेंजर फटने से लगी भीषण आग के दौरान CISF की तत्परता ने एक बड़ी तबाही को टाल दिया। अलार्म बजते ही मात्र 180 सेकंड (3 मिनट) के भीतर CISF की क्यूआरटी टीम ने मोर्चा संभाला और फायर सेफ्टी सिस्टम को सक्रिय कर दिया
राजस्थान के रेगिस्तान की धोरों में बना पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट सोमवार दोपहर को एक बड़े धमाके से दहल उठा। लेकिन इस विनाशकारी आग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित लोकार्पण समारोह के बीच दीवार बनकर खड़े हो गए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान। जब रिफाइनरी के सीडीयू-वीडीयू (CDU-VDU) साइड पर एक्सचेंजर फटा और आग की लपटें आसमान छूने लगीं, तब जवानों की 3 मिनट की मुस्तैदी ने राजस्थान के इस 'स्वप्निल प्रोजेक्ट' को राख होने से बचा लिया।
दोपहर के करीब 1 बजकर 47 मिनट हुए थे, जब रिफाइनरी परिसर में अचानक आग का अलार्म (Danger Alarm) गूंज उठा। अलार्म बजते ही CISF की क्यूआरटी (Quick Response Team) हरकत में आई। बिना एक सेकंड गंवाए जवान उस यूनिट की तरफ दौड़े जहाँ से धुएं का काला गुबार उठ रहा था।
आमतौर पर ऐसी भीषण आग में बचाव कार्य शुरू करने में काफी समय लगता है, लेकिन पचपदरा में CISF के जवानों ने सिर्फ 3 मिनट में घटनास्थल पर पहुँचकर फायर सेफ्टी सिस्टम को मैन्युअल तरीके से सक्रिय कर दिया। पानी की बौछारें शुरू हुईं और आग के चारों ओर एक सुरक्षा घेरा बना दिया गया ताकि लपटें पास की अन्य पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को अपनी चपेट में न ले लें।
दोपहर 2 बजे के बाद बालोतरा, बाड़मेर और आसपास के इलाकों से दमकल की गाड़ियां पहुँचनी शुरू हुईं।
21 अप्रैल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस रिफाइनरी का उद्घाटन करना था। ऐसे में सुरक्षा मानकों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन CISF जवानों ने न केवल आग बुझाई, बल्कि प्रशासन और पुलिस को भी रियल-टाइम अपडेट देकर स्थिति को पैनिक (Panic) होने से बचाया।
एक्सचेंजर फटने की घटना कितनी गंभीर थी, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर रिफाइनरी की पाइपलाइनें इसकी चपेट में आतीं, तो धमाका कई किलोमीटर दूर तक महसूस होता। सीआईएसएफ की सतर्कता के कारण अब नुकसान का आंकलन केवल एक यूनिट तक सीमित है, जिसे जल्द ही दुरुस्त करने का काम शुरू कर दिया गया है।