ऋण राशि स्वीकृत नहीं
बालोतरा.
केन्द्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना में बैंक के ऋण राशि स्वीकृत नहीं करने से सैकड़ों जने नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं, जहां से उन्हें शीघ्र स्वीकृति का आश्वासन देकर लौटाया जा रहा हैं। इस पर नया घर बनाने तो पुराने के विस्तार को लेकर सैकड़ों जनों का सपना साकार नहीं हो रहा है।
वर्ष2022 तक देश के प्रत्येक नागरिक का स्वयं का पक्का आवास हो, इसे लेकर केन्द्र सरकार ने कुछ वर्ष पहले प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू की थी। इसमें ग्रामीण क्षेत्र में भवन से वंचित व चयनित परिवारों के मकान बनाने पर उन्हें 1.50 लाख रुपए देने का प्रावधान है। शहरी क्षेत्र में सरकार ने योजना पारूप में बदलाव करते हुए नकद राशि नहीं देने का प्रावधान कर रखा है। नगरीय क्षेत्र में भूखंड मालिकों के भवन बनाने पर बैंक उन्हें अधिकमत 6.50 लाख रुपए का ऋण देती है। आवेदक को किश्तों में इस राशि को जमा करवाना होता है। करीब 15- 18 किश्तों में राशि जमा करवाने का प्रावधान है। योजना में स्वीकृत राशि के चुकाने में जो ब्याज लगता है, वह 1.50 लाख रुपए होता है। सरकार चयनित परिवार के ब्याज का भुगतान करती है। इस पर एक तरह बगैर ब्याज राशि में योजना में चयनित परिवार का एक सामान्य मकान बन जाता है।
ऋण स्वीकृत नहीं, काट रहे चक्कर- बालोतरा में योजना के तहत 278 भूखंड मालिकों व 65 रजिस्ट्रीधारकों नेद आवेदन किया। नगर परिषद ने प्राप्त आवेदन पत्रों को सितम्बर में जयपुर भिजवाया, लेकिन योजना संबंद्धित बैंकों ने किसी आवेदन को ऋण नहीं दिया है। इस पर नगर परिषद ने नवम्बर में बैकों को पुन: स्मृति पत्र भेजे, लेकिन अभी तक स्थिति वही है। इस पर आवेदन नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
प्रधानमंत्री के गरीब व चयनित परिवारों को घर देने के सपने से नगरपरिषद को लगता है यहां कोई सरोकार ही नहीं है। 110 लोगों के आवेदन लिए गए है लेकिन आगे कुछ भी नहीं किया गया। योजना की ढीली प्रगति पर जिला कलक्टर की ओर से कई बार बैठकों में डांट पिलाने के बाद भी अधिकारी योजना को सिरे नहीं चढ़ा रहे है।
बाड़मेर
इधर, बाड़मेर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2016-2017 में आवास जारी करने के लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। शिविर लगाकर नगर परिषद ने चालीस वार्ड से 110 आवेदन स्वीकार किए है। इन परिवारों के दस्तावेज पूर्णता पर करीब डेढ़ लाख की मदद नगरपरिषद और 6.5 लाख का अधिकतम बैंक ऋण मिलने से आवास बनने का सपना पूरा हो सकता है लेकिन नगरपरिषद ने योजना के तहत कार्य किया ही नहीं।