बाड़मेर

Pachpadra Refinery News : जहां हो रही ‘रिफाइनरी’ की बड़ी-बड़ी बातें, वहां ‘बूंद-बूंद पानी’ को मोहताज लोग, जानें क्या है ‘पत्रिका’ की ग्राउंड रिपोर्ट?

21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पचपदरा रिफाइनरी का उद्घाटन कर राजस्थान के औद्योगिक विकास का नया अध्याय लिखेंगे, लेकिन इसी रिफाइनरी के इर्द-गिर्द बसे दर्जनों गांवों के ग्रामीण 'बूंद-बूंद' पानी के लिए मोहताज हैं।

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Apr 15, 2026

मारवाड़ की तपती रेतीली धरा पर 21 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'रिफाइनरी' के रूप में राजस्थान के सुनहरे भविष्य का उद्घाटन करने जा रहे हैं। पचपदरा में करीब 2 लाख लोगों की भीड़ जुटाकर इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां अपने चरम पर हैं, लेकिन इसी रिफाइनरी के इर्द-गिर्द बसे दर्जनों गांवों की हकीकत बेहद डरावनी है।

जहाँ अरबों रुपयों के निवेश और विकास के बड़े-बड़े दावों की गूंज है, वहीं उसी जमीन पर खड़ा आम इंसान आज मीठे पानी के लिए 10 से 12 दिनों का इंतजार करने को मजबूर है। विजेता की तरह पेश की जा रही इस 'रिफाइनरी' की चमक उन पशुपालकों और ग्रामीणों की आंखों में चुभ रही है, जो भीषण गर्मी की शुरुआत में ही जल संकट के कारण दर-दर भटक रहे हैं।

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उम्मेदसागर-धवा-कल्याणपुर-समदड़ी-खंडप पेयजल योजना कागजों पर भले ही सफल हो, लेकिन धरातल पर यह 'सूखी' पड़ी है। अधिकारियों की लापरवाही और मॉनिटरिंग के अभाव ने मोदी के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' वाले क्षेत्र में ही पेयजल व्यवस्था को आईसीयू (ICU) पर ला दिया है।

बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज ग्रामीण

गर्मी की शुरुआत के साथ ही बालोतरा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था बुरी तरह से लड़खड़ा गई है। उम्मेदसागर-धवा-कल्याणपुर-समदड़ी-खंडप पेयजल योजना के तहत 10 से 12 दिन के अंतराल में मीठे पानी की आपूर्ति होने से ग्रामीण बूंद-बूंद पानी को तरस गए है। वहीं पशुपालकों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा और है। कर्मचारियों की लापरवाही से हजारों ग्रामीण परेशान है, जिससे उनमें रोष व्याप्त है।

पचपदरा रिफाइनरी प्रोजेक्ट के नज़दीक एक गांव की तस्वीर

भीषण गर्मी से पहले ही बिगड़ी व्यवस्था

गर्मी की शुरुआत के साथ ही जिले के समदड़ी, रामपुरा, महेश नगर, चिरडिया, खरंटिया, मजल, ढीढस, अजीत, पातों का बाड़ा, मोहनपुरा, गिराद का ढाणा, खेजड़ियाली, भलरों का बाड़ा, चारणों का बाड़ा सहित दो दर्जन से अधिक गांवों में पेयजल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

योजना से दस से बारह दिन में कम समय और कम दबाव से पानी की आपूर्ति होने के कारण ग्रामीणों को चार दिन की जरूरत जितना पानी ही मुश्किल से मिल पाता है। शेष दिनों में पानी के लिए परेशान रहना पड़ता है। मजबूरी में ग्रामीण महंगा पानी खरीदकर जरूरतें पूरी कर रहे हैं, जिससे कमजोर और सामान्य परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।

पशुपालक सबसे ज्यादा प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार, पानी खरीदने पर प्रति माह करीब दो हजार रुपए तक खर्च करना पड़ रहा है। पिछले एक माह से बिगड़ी व्यवस्था के कारण लोग थक चुके हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि महंगा पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझाएं या पशुओं की जरूरतें पूरी करें। इस समस्या ने आमजन के साथ-साथ पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।

... इधर तीन वर्षों से नियमित जलापूर्ति ठप

कल्याणपुर क्षेत्र में गर्मी की शुरुआत के साथ ही जल संकट गंभीर हो गया है। क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत से आमजन परेशान हैं, वहीं कस्बे में पानी की चोरी के मामले भी सामने आ रहे है, जहां मनमाने दामों पर टैंकरों से पानी बेचा जा रहा है। कल्याणपुर ग्राम पुरोहितों का वास के निवासियों के अनुसार पिछले तीन वर्षों से क्षेत्र में जलापूर्ति की स्थिति अत्यंत खराब बनी हुई है।

नियमित पानी नहीं मिलने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वर्तमान में गर्मी बढ़ने के साथ स्थिति और अधिक विकट हो गई है। ग्रामीणों को पीने व दैनिक उपयोग के लिए 700 रुपए खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाना पड़ रहा है, जो आर्थिक रूप से काफी बोझिल साबित हो रहा है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में स्थायी जलापूर्ति के लिए शीघ्र ठोस व्यवस्था की जाए। इसके तहत पाइपलाइन सुधार, टैंकरों की नियमित सरकारी आपूर्ति या अन्य आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

लोगों ने बताई परेशानी

गांव में पेयजल आपूर्ति बुरी तरह से लड़खड़ाई हुई है और दस दिन के अंतराल में पानी मिलने से प्रति माह करीब दो हजार रुपए पानी पर खर्च हो रहे हैं। - मनोहर सिंह बालावत, ग्रामीण

एक पखवाड़े से अधिक समय से व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ी हुई है और लोग मीठे पानी को तरस गए हैं। प्रशासन को मॉनिटरिंग कर सुधार करना चाहिए। - सुरेश प्रजापत, ग्रामीण

गांवों में पेयजल आपूर्ति नाम मात्र की रह गई है. यहां तक कि खारा पानी भी समय पर नहीं मिल पाता है. वहीं अधिकारी भी फोन तक रिसीव नहीं करते। - लूंबाराम पटेल, ग्रामीण

पिछले एक माह से गांवों में पेयजल आपूर्ति बिगड़ी हुई है। समझ में नहीं आ रहा कि कम दवाब से मिल रहे पानी से खुद की प्यास बुझाएं या पशुओं की। - केवल राम, ग्रामीण

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Published on:
15 Apr 2026 01:58 pm
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