
Rajasthan Indo Pak Border: गडरारोड (बाड़मेर)। बस, कुछ ही दिन शेष है… भारत के विकास का एक नया आयाम पाकिस्तान के सामने होगा। भारत ने जिस सीमा से पाकिस्तान के दांत खट्टे कर खदेड़ा था, वहां पाकिस्तान तो अब तक बिजली के खंभे भी नहीं पहुंचा पाया है, ग्रेवल सड़क तक नहीं बना पाया है लेकिन भारत की विद्युत ट्रेन सामने जाकर खड़ी होगी। रेलवे विद्युतिकरण का कार्य भारत के गडरारोड से होते हुए अंतिम रेलवे स्टेशन मुनाबाव तक का कार्य पूरा हो चुका हैं।
यहां खास तथ्य यह है कि यह वही गडरारोड़ है जो 1947 में बसा था। देश की आजादी के वक्त पाकिस्तान के व्यापारिक कस्बे गडरासिटी के सभी लोगों ने एक साथ फैसला लिया और रातों-रात गडरासिटी छोड़कर भारत के गडरारोड़ आकर बस गए। गडरासिटी अब वीरान पड़ा है, वहां एक विद्युत खंभा है न विकास।
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इधर, गडरारोड़ भारत का बड़ा व्यापारिक कस्बा बन गया है और यहां विद्युत रेल की तैयारियां अंतिम चरण में है। बाड़मेर से मुनाबाव के बीच अमृत भारत योजना के अंतर्गत सभी रेलवे स्टेशन भवन नए बनाए जा रहे हैं। आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। बड़े शहरों की तर्ज पर सुंदर एवं आकर्षक प्लेटफार्म, इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाने की तैयारी हो रही हैं।
इसके अलावा पाकिस्तान के ठीक सामने बॉर्डर से सटे गांवों को जोड़ते हुए सड़क मार्ग पर बाड़मेर से मुनाबाव के बीच नेशनल हाईवे, बाखासर से गागरिया होते हुए मुनाबाव, सुंदरा से आगे तनोट माता जैसलमेर तक भारत माला हाईवे से जुड़ गया हैं। जो पाकिस्तान के सामने भारत के विकास की एक नई तस्वीर पेश कर रहा हैं वहीं भारत के साथ आजाद हुए पाकिस्तान बॉर्डर पर दुर्दशा की तस्वीरे सोशल मीडिया के जरिए आ रही हैं।