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Indian Railways: राजस्थान में व्यस्त रूटों पर बढ़ेगी रफ्तार, मेट्रो की तर्ज पर एक ही ट्रैक पर दौड़ेगी कई ट्रेन

North Western Railway: रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। आउटर पर ट्रेनों का लंबा इंतजार और सिग्नल के कारण होने वाली देरी अब काफी हद तक कम हो सकेगी।

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राजस्थान में व्यस्त रूटों पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। रेल यात्रियों के लिए राहत की खबर है। आउटर पर ट्रेनों का लंबा इंतजार और सिग्नल के कारण होने वाली देरी अब काफी हद तक कम हो सकेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे अपने व्यस्त रेलमार्गों पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और मल्टी सेक्शन एक्सल काउंटर जैसी अत्याधुनिक तकनीक लागू कर रहा है। इससे मेट्रो में अपनाई जाने वाली प्रणाली की तरह एक ही ट्रैक पर सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक के पीछे एक कई ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे में 355 किलोमीटर रेलखंड पर यह प्रणाली लागू की जा चुकी है, जबकि 530 किलोमीटर रेलखंड पर कार्य प्रगति पर है। तकनीक के विस्तार से मौजूदा ट्रैक की क्षमता बढ़ेगी, ट्रेनों का ठहराव घटेगा और यात्रियों को अधिक समयबद्ध यात्रा का लाभ मिलेगा। इसके अलावा 130 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से संचालन के लिए डबल डिस्टेंट सिग्नलिंग का कार्य पालनपुर-अजमेर, कानोता-बावल, अनाजमंडी-रेवाड़ी, खेरोदा-कानोर तथा लूनी-मारवाड़ रेलखंडों पर पूरा किया जा चुका है।

जहां एक ट्रेन चलती थी, वहां अब 6 से 8 ट्रेनें

वर्तमान व्यवस्था में दो स्टेशनों के बीच बने लंबे ब्लॉक सेक्शन में एक समय पर केवल एक ट्रेन को संचालन की अनुमति होती है। ऑटोमैटिक सिग्नलिंग के तहत इन सेक्शनों को कई छोटे इलेक्ट्रॉनिक ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है। इससे सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए एक ही रेलखंड पर कई ट्रेनों का संचालन संभव हो जाता है। उदाहरण के तौर पर, 10 किलोमीटर लंबे सेक्शन में जहां पहले एक समय में केवल एक ट्रेन चल सकती थी, वहीं अब 6 से 8 ट्रेनें अलग-अलग ब्लॉकों में संचालित हो सकेंगी।

80 से 90 प्रतिशत तक बढ़ेगी क्षमता

रेलवे अधिकारियों के अनुसार ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से मौजूदा ट्रैक की लाइन क्षमता औसतन 80 से 90 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है। इसके लिए नई लाइन बिछाने, अतिरिक्त स्टेशन बनाने या बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होगी। यही कारण है कि इसे क्षमता विस्तार का किफायती और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है।

24 घंटे होगी ट्रैक की निगरानी

नई प्रणाली में पारंपरिक ट्रैक सर्किटिंग की जगह मल्टी सेक्शन एक्सल काउंटर लगाए जा रहे हैं। ये उपकरण ट्रेन के एक्सलों की गणना कर यह सुनिश्चित करते हैं कि ट्रैक खंड खाली है या उस पर कोई ट्रेन मौजूद है। इससे ट्रैक की स्थिति की सटीक और रियल टाइम जानकारी मिलती रहती है।

सिग्नल फेल होने की घटनाएं होंगी कम

रेलवे अधिकारियों के अनुसार नई तकनीक से सिग्नल फेल होने की घटनाओं में कमी आएगी। एक्सल काउंटर आधारित प्रणाली के कारण ट्रेनों की अनावश्यक डिटेंशन घटेगी, सुरक्षा मजबूत होगी और संचालन अधिक विश्वसनीय बनेगा।

व्यस्त रूटों पर बढ़ेगी रफ्तार

रेवाड़ी-जयपुर-अहमदाबाद जैसे व्यस्त रूटों पर यह सिस्टम लागू किया जा रहा है। जोन में 355 किलोमीटर रेलखंड पर इसे शुरू किया जा चुका है। नई तकनीक से सुरक्षा बढ़ेगी, ट्रैक की रियल टाइम निगरानी होगी और ट्रेनों का ठहराव कम होने से यात्रियों का समय बचेगा।
-अमित सुदर्शन, सीपीआरओ, उत्तर पश्चिम रेलवे