बाड़मेर

Rajasthan Pachpadra Refinery: पचपदरा रिफाइनरी का वर्षों पुराना सपना हुआ साकार, ‘पत्रिका’ ने भी निभाई अहम भूमिका

Rajasthan News: बालोतरा के पचपदरा में बनी देश की 23वीं रिफाइनरी का उद्घाटन पश्चिमी राजस्थान के लिए ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे प्रदेश में उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर खुलेंगे।
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Jul 04, 2026
HiTech Refinery
रिफाइनरी का फोटो: पत्रिका

पश्चिमी राजस्थान के रेतीले धोरों से अब ऐसी चमक निकलेगी, जिसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई देगी। 4 जुलाई इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज होने जा रहा है, जब बालोतरा के पचपदरा में स्थापित हाईटेक रिफाइनरी का उद्घाटन होगा। ये केवल कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं, बल्कि रेगिस्तान की तकदीर बदलने वाला 'इकोनॉमिक पावरहाउस' है। राजस्थान वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल करने जा रहा है। यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान में औद्योगिक और आर्थिक परिवर्तन की आधारशिला है।

करीब 79,459 करोड़ रुपए की लागत से विकसित यह परियोजना भारत का पहला ग्रासरूट एकीकृत रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परिसर है। जिसे विशेष रूप से भारी और कम लागत वाले कच्चे तेल के प्रसंस्करण के लिए डिजाइन किया गया है। यह परियोजना न सिर्फ राज्य को राजस्व और रोजगार देगी, बल्कि उसे वैश्विक ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल उद्योग में एक मजबूत पहचान भी दिलाएगी।

बालोतरा के पचपदरा में स्थापित ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह पेट्रो-रसायन परिसर देश के ऊर्जा और पेट्रो-रसायन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस परिसर में रिफाइनिंग और पेट्रो-रसायन उत्पादन होगा। इसकी पेट्रो-रसायन क्षमता 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है और पेट्रो-रसायन उत्पादन 26 प्रतिशत से अधिक है, जो दक्षता और स्थिरता के वैश्विक मानकों के अनुरूप है। इस परियोजना से पेट्रो-रसायन आत्मनिर्भरता बढ़ने और औद्योगिक विकास की गति मिलने की उम्मीद है।

देश की 23वीं रिफाइनरी है

पचपदरा में देश की 23वीं रिफाइनरी स्थापित की गई है। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार इन सभी रिफाइनरियों की कुल शोधन क्षमता करीब 250 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष से अधिक है।

राजस्थान पत्रिका ने निभाई प्रभावी भूमिका


'तेल बदल सकता है तकदीर… फरवरी 2004 में प्रकाशित यह सिर्फ एक शीर्षक नहीं था। यह राजस्थान के भविष्य की वह दस्तक थी, जिसे सबसे पहले राजस्थान पत्रिका ने सुना और प्रदेश को सुनाया।


जब तेल और गैस के विशाल भंडार मिलने की खबरें आईं, तब पत्रिका ने पूछा- 'राजस्थान में तेल व गैस अन्वेषण की कछुआ चाल' आखिर क्यों? फिर आवाज बुलंद हुई, 'साथी हाथ बढ़ाना… तो खजाने खुल जाएंगे।' यह सरकारों, जनप्रतिनिधियों और समाज से राजस्थान के हक के लिए एक सामूहिक आह्वान था।


जब रिफाइनरी का सपना राजनीतिक फैसलों और प्रशासनिक उलझनों में फंसने लगा, तब राजस्थान पत्रिका ने लिखा, 'राज्य के हितों से खिलवाड़', 'तेल पर भारी खेल', 'तेल रिफाइनरी की आंख मिचौली' और 'विदेशी कंपनियों ने लगाया ग्रहण!'। हर खबर ने एक सवाल उठाया, क्या राजस्थान अपनी धरती की संपदा का लाभ पाने से वंचित रहेगा?


वर्षों तक सरकारें बदलती रहीं, नीतियां बदलती रहीं, लेकिन राजस्थान पत्रिका का अभियान नहीं बदला। 'मिशन राजस्थान' के तहत पत्रिका ने इस मुद्दे को कभी दबने नहीं दिया। खबरों को जनचर्चा बनाया, जनचर्चा को जनदबाव और जनदबाव को जनहित का संकल्प। आज जब राजस्थान में रिफाइनरी का सपना साकार हो रहा है, तो यह केवल एक औद्योगिक परियोजना की कहानी नहीं, बल्कि उस प्रतिबद्ध पत्रकारिता की मिसाल भी है जिसने वर्षों तक एक सवाल जिंदा रखा राजस्थान के संसाधनों पर पहला अधिकार राजस्थान के विकास का ही होना चाहिए। यही राजस्थान पत्रिका की पहचान है, यही उसकी भूमिका।

तेल कहां से आएगा?

  1. स्थानीय कच्चा तेल: बाड़मेर के तेल क्षेत्रों से निकलने वाला कच्चा तेल पाइपलाइन से सीधे यहां पहुंचेगा।
  2. आयातित कच्चा तेल: चूंकि रिफाइनरी की क्षमता 9 एमएमटीपीए (मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष) है, इसलिए कमी को पूरा करने के लिए अरब देशों या अन्य जगहों से तेल आयात किया जाएगा। यह तेल गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर उतरेगा और वहां से पाइपलाइन के जरिए पचपदरा लाया जाएगा।

उत्पाद वापस कैसे जाएंगे?

  1. पाइपलाइन के जरिए सबसे सस्ता और सुरक्षित है। पाइपलाइन से मुंद्रा जाएगा।
  2. सड़क मार्ग से तेल, गैस के अलावा टैंकरों के जरिए सड़क मार्ग से जाएंगे।
  3. रेल के जरिए बालोतरा से पचपदरा तक लगभग 12 किमी रेल लाइन बिछाई जाएगी। भविष्य में इससे बड़े पैमाने पर उत्पाद रेलवे टैंकरों से भेजे जा सकेंगे।

राजस्थान पेट्रोजोन को भी रफ्तार, निवेश को उड़ान

  • पहले चरण में: 75 भूखंड, 36 का आवंटन
  • दूसरे चरण में: 257 प्लॉट, 87.64 हेक्टेयर में विस्तार
  • प्रस्ताव: 43.19 करोड़ निवेश
  • संभावना: 476 को रोजगार

पचपदरा रिफाइनरी के साथ पश्चिमी राजस्थान में 'राजस्थान पेट्रोजोन' विकसित करने की दिशा में बोरावास कला औद्योगिक क्षेत्र में काम तेज कर दिया है। रिफाइनरी आधारित उद्योगों के लिए तैयार किए जा रहे इस क्षेत्र में प्रथम चरण में सुविधाएं विकसित कर प्लॉट आवंटन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग-25 पर स्थित है, यहां सड़क, बिजली सहित बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है। रीको बोरावास प्रथम के अलावा यहीं द्वितीय चरण में भी प्लॉट चिह्नित कर रहा है। दोनों योजनाओं में कुल भूखंड 332 हैं।

प्रथम चरण में 29.77 हेक्टेयर भूमि पर 75 औद्योगिक भूखंड और 8 प्लग एंड प्ले फैक्टरी शेड का नियोजन किया गया है। अब तक 36 भूखंड 25 औद्योगिक इकाइयों को आवंटित किए जा चुके हैं, जिनमें 43.19 करोड़ रुपए निवेश और 476 लोगों को रोजगार मिलने का प्रस्ताव है। शेष भूखंडों के लिए आवंटन प्रक्रिया जारी है और नए आवेदनों पर कार्रवाई चल रही है।

राजस्थान को ये फायदे

  • प्रतिवर्ष लगभग 21 हजार करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त होगा।
  • लगभग 10 हजार प्रत्यक्ष तथा हजारों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर।
  • निर्माण में प्रतिदिन 25 से 30 हजार श्रमिकों ने इसको आकार दिया।
  • देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड रिफाइनरी एवं पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में से एक
  • इसकी 9 एमएमटीपीए रिफाइनिंग, 2.4 मिलियन मीट्रिक टन प्रतिवर्ष पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता
Updated on:
04 Jul 2026 08:57 am
Published on:
04 Jul 2026 08:55 am