बाड़मेर

Rajasthan News: 7 बच्चों का पिता ढलाराम जिंदगी-मौत से जूझ रहा, इलाज के लिए चाहिए 50 लाख रुपए

Balotra News: दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले ढलाराम आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
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Apr 04, 2026
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Balotra News: राजस्थान के बालोतरा जिले के मूंगड़ा गांव की कच्ची गलियों में एक ऐसा घर भी है, जहां हर सुबह उम्मीद के साथ शुरू होती है, लेकिन हर रात बेबसी के आंसुओं में खत्म हो जाती है। इस घर में खाट पर लेटे ढलाराम भील की सांसें ही अब पूरे परिवार की सबसे बड़ी चिंता बन गई हैं।

बीमारी से बड़ी मजबूरी, रोजी-रोटी का संकट

दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाले ढलाराम आज जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। पेट में आंत की गंभीर बीमारी ने उन्हें इस कदर कमजोर कर दिया है कि अब वह उठने तक की स्थिति में नहीं हैं।

जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में जांच व इलाज करवाने के बाद एम्स जोधपुर में ऑपरेशन भी करवाया, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। इलाज करने वाले चिकित्सकों ने आंत की गंभीर बीमारी के आगे के इलाज के लिए चेन्नई जाने की सलाह दी है।

घर की हालत इतनी खराब है कि रोज चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है। जिस व्यक्ति के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी, आज वही खाट पर बेबस पड़ा है। इलाज के लिए चेन्नई में करीब 50 लाख रुपए का खर्च बताया गया है, जो इस परिवार के लिए असंभव सा है।

बेबसी में परिवार की आंखें मदद को तरसतीं

ढलाराम के परिवार में पांच बेटियां और दो बेटे हैं। सातों मासूम बच्चों की आंखों में एक ही सवाल तैरता है कि पापा ठीक कब होंगे? पत्नी की सूनी आंखें और कांपते हाथ हर आने-जाने वाले से एक ही गुहार करते हैं कि किसी तरह उनके घर के सहारे को बचा लिया जाए।

परिवार की हर सांस अब मदद की पुकार बन चुकी है। यह बेबसी सिर्फ एक मरीज की नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की है, जो उम्मीद लगाए बैठा है कि कोई मदद का हाथ बढ़ाएगा, कोई भामाशाह आगे आएगा या सरकार उनकी पुकार सुनेगी। ऐसे में ढलाराम के इलाज को लेकर अगर समय रहते सहायता नहीं मिली, तो एक परिवार की खुशियां छीन सकती है।

Updated on:
04 Apr 2026 03:12 pm
Published on:
04 Apr 2026 03:12 pm