
बाड़मेर. राजकीय मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कनिष्ठ (जूनियर) विद्यार्थियों पर बाल छोटे करवाने, निर्धारित औपचारिक परिधान (फॉर्मल ड्रेस) पहनने और विशेष तरीके से परिचय देने का दबाव बनाने के आरोपों के बीच करीब 80 विद्यार्थियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। एंटी रैगिंग कमेटी की अनुशंसा पर की गई इस कार्रवाई के बाद कॉलेज में हड़कंप मचा हुआ है। कॉलेज प्रशासन ने पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) को भेज दी है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, मामले की शुरुआत तब हुई जब करीब 10 से 15 कनिष्ठ विद्यार्थियों के बाल छोटे दिखाई दिए। संकाय सदस्यों ने उनसे सहज माहौल में बातचीत की तो विद्यार्थियों ने बताया कि कुछ वरिष्ठ विद्यार्थियों की ओर से व्हाट्सएप कॉल और संदेशों के माध्यम से बाल छोटे रखने, फॉर्मल ड्रेस पहनने और एक विशेष प्रकार का परिचय देने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने मामले की पड़ताल शुरू की और संबंधित वरिष्ठ विद्यार्थियों की पहचान की।
जांच में सामने आया कि कनिष्ठ विद्यार्थियों ने नियमित शैक्षणिक गतिविधियां समाप्त होने के बाद विधिवत आवेदन देकर कॉलेज के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षा गार्ड के रजिस्टर में अपनी प्रविष्टि दर्ज करवाई थी। उन्होंने पुस्तकों और अन्य आवश्यक कायर्यों के लिए शहर जाने की अनुमति एवं सूचना दी थी। इसके बाद वे शहर के सैलून में गए और बाल छोटे करवाकर लौटे।
रैगिंग के प्रति मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जीरो टॉलरेंस नीति है। एंटी रैगिंग कमेटी की अनुशंसा पर करीब 80 विद्यार्थियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। पूरे मामले की जांच रिपोर्ट एनएमसी को भेज दी है। विद्यार्थियों की सुरक्षा और गरिमा से समझौता नहीं किया जाएगा।
- अनूपसिंह गुर्जर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, बाड़मेर
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को मिली शिकायत में प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के जबरन बाल कटवाने, धमकाने, मेडिकल आईडी और एमएलसी से जुड़े मामलों में दबाव बनाने तथा कनिष्ठों को 'व्हाइट हाउस' ले जाकर अपमानजनक निर्देश देने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, कॉलेज प्रशासन का कहना है कि जांच में इन आरोपों की पुष्टि करने वाले साक्ष्य नहीं मिले। प्राचार्य अनूपसिंह गुर्जर के अनुसार, व्हाइट हाउस मेडिकल कॉलेज से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित एक कमरा है। वहां इस तरह की गतिविधि होने की पुष्टि अब तक की जांच में नहीं हुई है।